रायपुर। छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर (GST) विभाग में वर्ष 2022 में हुई 42 पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। विभाग ने सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए की गई नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। 7 जुलाई 2022 को जारी नियुक्ति आदेश भी निरस्त कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद विभागीय भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला तत्कालीन GST कमिश्नर समीर विश्नोई के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया की जांच में परीक्षा के आयोजन, प्रश्नपत्र की गोपनीयता, आरक्षण रोस्टर और चयन प्रक्रिया से संबंधित कई गंभीर बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
42 पदों की भर्ती प्रक्रिया हुई निरस्त
द बिगुल की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ GST विभाग में लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त करने के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत 42 पदों पर चयन किया गया था।
जांच के बाद विभाग ने पूरी चयन प्रक्रिया को शून्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही 7 जुलाई 2022 को जारी नियुक्ति आदेशों को भी रद्द कर दिया गया। इस फैसले से परीक्षा के माध्यम से पदोन्नत होकर कर निरीक्षक बने कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ा है।
प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन को लेकर सवाल
रिपोर्ट में परीक्षा की गोपनीयता और संचालन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। इसमें तत्कालीन GST कमिश्नर समीर विश्नोई की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कमिश्नर की भूमिका थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए मूल जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
जांच में परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आरक्षण रोस्टर और अभिलेखों में अनियमितता का आरोप
भर्ती प्रक्रिया की जांच में पदों के वर्गवार आरक्षण रोस्टर से संबंधित कमियों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा करीब 300 परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उपस्थिति पत्रक का रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
जांच में समेकित परीक्षा परिणाम और अंक तालिका तैयार नहीं किए जाने तथा सीधे चयन सूची जारी किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख है।
यदि ये कमियां आधिकारिक जांच में प्रमाणित होती हैं, तो इससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं।
पुनर्मूल्यांकन को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में समानता पाए जाने और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने के लिए पुनर्मूल्यांकन कराया गया।
रिपोर्ट में चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, पुनर्मूल्यांकन में किसी तरह की अनियमितता या जानबूझकर लाभ पहुंचाने की बात को प्रमाणित करने के लिए जांच के मूल दस्तावेजों और अंतिम निष्कर्षों की आवश्यकता है।
RTI और विधानसभा में उठ चुका था मामला
द बिगुल की रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायतें और सवाल पहले भी सामने आए थे। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह मामला विधानसभा में कई बार उठाया गया था। इसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने की बात भी सामने आई है। इस दोबारा आयोजित परीक्षा में कुछ योग्य अभ्यर्थियों के शामिल नहीं होने का दावा किया गया है।
इस संबंध में विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक बयान से ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कर्मचारियों को मूल पदों पर लौटाया गया
भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस भेजे जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
इन कर्मचारियों में वे लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने निर्धारित सेवा अवधि और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर परीक्षा में भाग लिया था।
नियुक्तियां रद्द होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों के सामने प्रशासनिक और कानूनी विकल्पों से जुड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं। मामले में आगे न्यायालयीन कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल
रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की है। कैविएट का उद्देश्य संबंधित मामले में न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित करने से पहले विभाग का पक्ष सुने जाने का अवसर प्राप्त करना होता है।
भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों की ओर से संभावित कानूनी चुनौती और न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर नजर रहेगी।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी आगे की कार्रवाई
GST विभाग की 42 पदों वाली भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने से सरकारी विभागों में भर्ती और पदोन्नति प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रश्नपत्र की गोपनीयता, परीक्षा रिकॉर्ड, पुनर्मूल्यांकन और चयन सूची से जुड़े आरोप इस मामले के प्रमुख बिंदु हैं।
हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कथित अनियमितताओं की पुष्टि आधिकारिक जांच निष्कर्षों तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही की जा सकती है।
यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। आरोपों और जांच संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए मूल जांच रिपोर्ट, विभागीय आदेश और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष आवश्यक है।

