रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बेटी और नाती को खोने के बाद न्याय की मांग को लेकर पिता रामशिरोमणि मिश्रा कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। परिवार और समर्थकों का आरोप है कि इलाज में गंभीर लापरवाही हुई, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक अपेक्षित आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई है।
15 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार घटना के 18 दिन बाद भी जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होने का आरोप लगाते हुए परिवार और समर्थकों का आंदोलन जारी था। पिता करीब 13 दिनों से आमरण अनशन पर थे। इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने बीहर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह भी शुरू कर दिया।
बेटी और नवजात की मौत के बाद शुरू हुआ संघर्ष
मामला 26 अगस्त 2026 का है। रीवा के संजय गांधी स्मृति अस्पताल में 22 वर्षीय गर्भवती कल्पना मिश्रा की प्रसव के दौरान मौत हो गई। उनके नवजात बच्चे की भी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए और जिम्मेदार डॉक्टरों एवं स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
मामले को उस समय और ज्यादा चर्चा मिली जब कल्पना का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह इलाज के दौरान मदद की गुहार लगाती नजर आई थीं। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया और अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
पिता की मांग—सिर्फ निलंबन नहीं, FIR हो
कल्पना के पिता का कहना है कि उनकी मांग किसी आर्थिक मुआवजे की नहीं, बल्कि बेटी और नवजात की मौत की पूरी सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।
पिता ने आरोप लगाया कि केवल कर्मचारियों को निलंबित करने या अधिकारियों का तबादला करने से उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन लोगों की जिम्मेदारी सामने आए, उनके खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई भी हुई, लेकिन परिवार संतुष्ट नहीं
मामले में प्रशासन की ओर से कुछ कार्रवाई की जा चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक को पद से हटाया गया और डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई हुई। बाद में मेडिकल कॉलेज के डीन के तबादले की भी खबर सामने आई।
लेकिन परिवार का कहना है कि इन कार्रवाइयों से उनकी मूल मांग पूरी नहीं हुई है। वे चाहते हैं कि मामले की आपराधिक जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
पिता की तबीयत भी बिगड़ी
लगातार आमरण अनशन के कारण कल्पना के पिता की तबीयत भी खराब होने की खबर सामने आई है। 9वें दिन की रिपोर्ट में बताया गया कि लगातार भोजन नहीं लेने के कारण उनकी कमजोरी बढ़ गई थी और वे ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे थे।
बाद की रिपोर्टों में प्रशासनिक अधिकारियों के धरना स्थल पर पहुंचकर पिता और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की जानकारी भी सामने आई। कलेक्टर और एसपी ने प्रदर्शनकारियों की मांगें सुनीं और आंदोलन समाप्त करने को लेकर बातचीत की।
अब जल सत्याग्रह से आंदोलन तेज
15 सितंबर को आंदोलन ने नया रूप ले लिया। प्रदर्शनकारी बीहर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह करने लगे। उनका कहना है कि जब तक कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय नहीं होती और FIR दर्ज नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
यह आंदोलन अब केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक लोगों के भी धरना स्थल पर पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी धरना स्थल पहुंचकर परिवार से मुलाकात की थी।
मेडिकल लापरवाही के आरोपों की जांच जरूरी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में हुई। परिवार इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहा है, जबकि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
मामले में प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभागीय जांच की प्रक्रिया चलने की रिपोर्टें हैं। इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि मौत का अंतिम कारण क्या था या इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह जांच और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट होना है।
अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
एक तरफ परिवार अपनी बेटी और नवजात को खोने के बाद न्याय की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी तरफ पिता का लगातार अनशन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
परिवार की मांग है कि मामले में पारदर्शी जांच हो, जिम्मेदारी तय की जाए और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल रीवा में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला जांच और विरोध के बीच बना हुआ है। 15 सितंबर तक पिता का आमरण अनशन जारी था और आंदोलनकारियों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया था। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर हैं।

