नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी। हालांकि यह नियमित जमानत नहीं है। अदालत ने साफ किया कि इस अवधि में भारद्वाज के आचरण पर नजर रखी जाएगी और उसके बाद उनकी नियमित जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा।
किन शर्तों पर मिली जमानत?
अदालत ने अंतरिम जमानत देते समय कई सख्त शर्तें लगाई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक भारद्वाज को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत दी गई है।
सबसे अहम शर्तों में उन्हें मामले से जुड़े तथ्यों, अपनी सफाई, शिकायतकर्ता या उसके परिवार के संबंध में सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य सार्वजनिक मंच पर बयान, पोस्ट, वीडियो, पॉडकास्ट, इंटरव्यू या रील जारी करने से रोकना शामिल है।
अदालत ने शिकायतकर्ता, उसकी नाबालिग बेटी, परिवार के सदस्यों और अभियोजन पक्ष के गवाहों से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने पर भी रोक लगाई है। फोन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संपर्क करना भी इस पाबंदी के दायरे में है।
एक गलती पड़ सकती है भारी
अंतरिम जमानत का यह आदेश सीमित अवधि के लिए है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान भारद्वाज के व्यवहार को देखा जाएगा और नियमित जमानत की मांग पर आगे का फैसला उनके आचरण को ध्यान में रखकर किया जाएगा। पुलिस को भी अगली सुनवाई के दौरान उनके आचरण को लेकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा अदालत की अनुमति के बिना उन्हें देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी और उन्हें जांच में सहयोग करना होगा। सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश से बचने की शर्त भी लगाई गई है।
6 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। उस समय नियमित जमानत या अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने की मांग पर विचार किया जाएगा। पुलिस को भी तब तक भारद्वाज के आचरण और जमानत की शर्तों के पालन से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल उन्हें केवल तीन सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। नियमित जमानत का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
जंतर-मंतर की घटना से जुड़ा है मामला
यह मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ मारपीट की।
भारद्वाज को सितंबर की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से उनके खिलाफ मामले की गंभीरता और शिकायतकर्ता तथा उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए अपनी दलीलें रखीं।
मामले में SC/ST Act समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में POCSO Act के तहत दर्ज मामले का भी उल्लेख है। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है और जांच/अदालती प्रक्रिया जारी है।
कोर्ट ने जांच में भी उठाए सवाल
अंतरिम जमानत देते हुए अदालत ने जांच के कुछ पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को जंतर-मंतर घटना से जुड़े CCTV फुटेज, पुलिस द्वारा बनाए गए वीडियो/फोटो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया से संबंधित डिजिटल सामग्री को सुरक्षित कर जांच में शामिल करना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि घटना से संबंधित अंतिम निष्कर्ष सबूतों के आधार पर अदालत में निकाला जाना चाहिए, सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया की बहस के आधार पर नहीं।
कोर्ट ने कहा- जमानत को प्रदर्शन का माध्यम न बनाएं
अदालत ने जमानत के महत्व को लेकर भी टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार जमानत अदालत के भरोसे की अभिव्यक्ति है और इसे सार्वजनिक प्रदर्शन या शक्ति प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसी वजह से सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मामले से जुड़ी बयानबाजी को लेकर विशेष पाबंदियां लगाई गई हैं।
अदालत ने शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा तथा आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने के लिए कड़ी शर्तों के साथ सीमित अवधि की अंतरिम जमानत को उचित माना।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिली है, लेकिन उन्हें अदालत की सभी शर्तों का पालन करना होगा। पुलिस उनकी गतिविधियों और जमानत की शर्तों के पालन पर नजर रखेगी।
6 अक्टूबर को अदालत में मामले की अगली सुनवाई होगी। उस समय यह तय किया जाएगा कि उन्हें नियमित जमानत दी जाए, अंतरिम राहत बढ़ाई जाए या आगे कोई अन्य आदेश दिया जाए।
फिलहाल अदालत का आदेश स्पष्ट करता है कि अंतरिम जमानत मामले में अंतिम फैसला नहीं है। जंतर-मंतर की घटना से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर ही निकलेगा।

