नेल्लोर। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के कवाली गांव में एक बाघ की तस्वीर ने अचानक ग्रामीणों के बीच दहशत फैला दी। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में पहाड़ी पर एक विशाल बाघ बैठा हुआ दिखाई दे रहा था। तस्वीर सामने आते ही ग्रामीणों को लगा कि इलाके में सचमुच बाघ घूम रहा है। सूचना वन विभाग तक पहुंची तो अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। लेकिन जांच के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया।
पहाड़ी पर बैठे बाघ की तस्वीर हुई वायरल
दरअसल, कवाली गांव के एक युवक ने पहाड़ी की एक सामान्य तस्वीर ली और उसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बाघ की तस्वीर जोड़ दी। इसके बाद उसने इस तस्वीर को ऐसे पेश किया, जैसे उसके खेत के पास वास्तव में बाघ दिखाई दिया हो।
तस्वीर सोशल मीडिया पर पहुंचते ही तेजी से फैल गई। ग्रामीणों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि गांव के आसपास बाघ घूम रहा है। कई लोगों ने डर के कारण खेतों और पहाड़ी क्षेत्र की ओर जाने से भी परहेज करना शुरू कर दिया।
वन विभाग ने शुरू की तलाश
मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। अधिकारियों ने उस इलाके का निरीक्षण किया, जहां तस्वीर में बाघ दिखाई दे रहा था। टीम ने आसपास के क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संभावित संकेत तलाशे।
हालांकि, जांच के दौरान अधिकारियों को बाघ के होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। न बाघ दिखाई दिया और न ही उसकी मौजूदगी से जुड़े ऐसे संकेत मिले, जिनसे वायरल तस्वीर की पुष्टि हो सके।
जांच में सामने आया AI का खेल
वन विभाग की जांच के दौरान तस्वीर की वास्तविकता पर संदेह हुआ। बाद में पता चला कि तस्वीर असली नहीं थी, बल्कि AI की मदद से तैयार की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, युवक की पहचान एरन्ना होन्नूंची (Eranna Honnuunchi) के रूप में हुई है। उसने पहाड़ी की वास्तविक तस्वीर को AI की मदद से एडिट करके उसमें बाघ जोड़ दिया था।
खेत में काम से बचने के लिए रचा पूरा खेल
मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि युवक ने कथित तौर पर यह पूरा खेल खेत पर जाने से बचने के लिए रचा था।
परिवार ने जब उसे खेत में काम करने के लिए कहा, तो उसने AI से तैयार बाघ वाली तस्वीर बनाकर परिवार को दिखाई और दावा किया कि खेत के पास बाघ दिखाई दिया है। परिवार को जब बाघ की मौजूदगी का डर लगा तो उन्होंने उसे खेत में जाने से रोक दिया।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। युवक ने कथित तौर पर तस्वीर सोशल मीडिया पर भी डाल दी, जिसके बाद यह गांव में तेजी से फैल गई और वन विभाग तक मामला पहुंच गया।
वन विभाग ने युवक को उसी जगह ले जाकर कराया 50 बार उठक-बैठक
जब अधिकारियों को पूरी सच्चाई पता चली तो उन्होंने युवक को उसी पहाड़ी पर ले जाकर उससे पूछताछ की। रिपोर्टों के मुताबिक युवक से कैमरे के सामने यह भी बताया गया कि उसने AI की मदद से नकली बाघ की तस्वीर कैसे बनाई थी।
झूठी सूचना फैलाने और ग्रामीणों में अनावश्यक डर पैदा करने के मामले में अधिकारियों ने उसे 50 बार उठक-बैठक (squats) करने की सजा दी।
AI के दौर में वायरल तस्वीरों पर भरोसा करना पड़ा भारी
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि AI तकनीक जहां कई कामों को आसान बना रही है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल भ्रम और अफवाह फैलाने के लिए भी किया जा सकता है।
बाघ जैसे संवेदनशील वन्यजीव से जुड़ी तस्वीर या वीडियो सामने आने पर लोग अक्सर बिना सत्यापन के उसे आगे साझा कर देते हैं। इससे ग्रामीणों में डर फैलने के साथ-साथ वन विभाग और प्रशासन को भी वास्तविकता जांचने के लिए संसाधन लगाने पड़ते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
AI से तैयार नकली बाघ की तस्वीरों के कारण देश के दूसरे हिस्सों में भी वन विभाग को जांच करनी पड़ी है। 2026 में तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र में भी AI से तैयार बाघ की तस्वीर वायरल होने के बाद वन अधिकारियों को इसकी वास्तविकता जांचनी पड़ी थी। बाद में वहां भी बाघ की मौजूदगी नहीं मिली थी।
ग्रामीणों से अपील—बिना जांचे तस्वीर या वीडियो शेयर न करें
नेल्लोर की इस घटना से साफ है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर तस्वीर वास्तविक नहीं होती। खासकर वन्यजीवों से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को बिना पुष्टि के साझा करने से अफवाह तेजी से फैल सकती है।
ऐसी किसी भी तस्वीर या वीडियो को देखने पर लोगों को पहले स्थानीय वन विभाग या प्रशासन से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। अगर वास्तव में कोई जंगली जानवर आबादी वाले इलाके में दिखाई दे, तो उसके करीब जाने या भीड़ लगाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित तरीका है।

