बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में नौकरी के नाम पर कथित लेन-देन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा से निष्कासित पूर्व जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दोनों के खिलाफ जिला अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी दिलाने के नाम पर छह लोगों से कुल 6 लाख रुपये लेने का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
छह युवकों को नौकरी दिलाने का दिया भरोसा
मामले में शिकायत ग्राम ओड़ान के पूर्व सरपंच जीवन लाल कमल की ओर से किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत के मुताबिक, गांव के भाजपा कार्यकर्ता नाथूराम वर्मा के माध्यम से उनकी मुलाकात कृष्णा अवस्थी से हुई थी।
आरोप है कि कृष्णा अवस्थी ने जिला अस्पताल में वार्ड बॉय के छह पदों पर युवकों की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। इसके बदले प्रत्येक उम्मीदवार से एक-एक लाख रुपये लेने की बात कही गई।
शिकायत में दावा किया गया है कि इस तरह छह उम्मीदवारों से कुल 6 लाख रुपये लिए गए।
भाजपा कार्यालय में भी रकम लेने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, पहली बार 14 सितंबर 2025 को कथित तौर पर 3 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद 14 फरवरी 2026 को बलौदाबाजार स्थित भाजपा कार्यालय में बुलाकर कथित तौर पर 3 लाख रुपये और लिए गए।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस तरह कुल 6 लाख रुपये का भुगतान किया गया। मामले में कथित लेन-देन से संबंधित वीडियो और अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंपे जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस अब शिकायत, दस्तावेजों, वीडियो और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है।
युवकों को बेटे के पास भेजने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रकम लेने के बाद कृष्णा अवस्थी ने नौकरी के इच्छुक युवकों को अपने बेटे प्रणव अवस्थी के पास भेजा।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रणव अवस्थी ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कैंटीन में युवकों से मुलाकात की। यहां उनसे अंकसूची, फोटो, बैंक पासबुक सहित दूसरे दस्तावेज लिए जाने और कुछ कागजों पर हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप है।
युवकों को कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया था कि 24 अगस्त 2026 को उन्हें ज्वाइनिंग लेटर मिल जाएगा और इसके बाद जिला अस्पताल में नौकरी शुरू हो जाएगी।
लेकिन निर्धारित तारीख गुजरने के बाद भी नौकरी नहीं मिली।
इसके बाद युवकों ने कथित तौर पर अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा।
रायपुर कलेक्ट्रेट ले जाने का भी दावा
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, जब उन्होंने रकम वापस करने का दबाव बनाया तो उन्हें रायपुर कलेक्ट्रेट भी ले जाया गया। वहां अधिकारियों से बातचीत के जरिए नौकरी का रास्ता साफ कराने का भरोसा दिए जाने का आरोप है।
इसके बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ा और नौकरी नहीं लग सकी।
इसी बीच कृष्णा अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी पर पहले से चल रहे एक अन्य मामले में पुलिस कार्रवाई हुई और दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। अब नई FIR दर्ज होने के बाद दोनों के खिलाफ आरोपों की संख्या और जांच का दायरा बढ़ गया है।
पहले भी नौकरी के नाम पर शिकायतों का जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब कृष्णा अवस्थी और उनके बेटे के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप सामने आए हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रणव अवस्थी के खिलाफ शराब दुकान में सेल्समैन की नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप भी सामने आया था। इसके अलावा कृष्णा अवस्थी के खिलाफ ट्रांसफर और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने तथा कथित फर्जी नियुक्ति पत्र से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
यही वजह है कि अब नई FIR के बाद पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रकम लेने का कोई बड़ा नेटवर्क था या अलग-अलग मामलों में व्यक्तिगत शिकायतें हैं।
फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में भी जेल में हैं पिता-पुत्र
कृष्णा अवस्थी और प्रणव अवस्थी पहले से ही कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में बताए जा रहे हैं।
अब वार्ड बॉय की नौकरी के नाम पर 6 लाख रुपये लेने के आरोप में दर्ज नई FIR ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, रकम का वास्तविक लेन-देन हुआ या नहीं, कथित वीडियो और दस्तावेजों की प्रमाणिकता क्या है और नौकरी दिलाने का भरोसा किस आधार पर दिया गया था।
अब जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल यह पूरा मामला आरोपों और पुलिस जांच के स्तर पर है। FIR दर्ज होना आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
हालांकि एक के बाद एक सामने आ रही शिकायतों ने पूरे मामले पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। खासकर नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर रकम लेने, दस्तावेज जुटाने और ज्वाइनिंग की तारीख बताए जाने के आरोपों की जांच अब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस द्वारा लेन-देन से जुड़े कथित वीडियो, दस्तावेज और शिकायतकर्ताओं के बयान की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

