गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने वन भूमि एवं वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के अपने निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। *माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने गोहरामाल क्षेत्र में USTR के बफर क्षेत्र के भीतर कथित वन अतिक्रमण के संबंध में दायर दो रिट याचिकाओं—WPC No. 2680 of 2024 एवं WPC No. 2682 of 2024—को खारिज कर दिया है।*

दोनों मामलों की सुनवाई *31 अगस्त 2026* को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष हुई। दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ और मामलों को दो बार पुकारे जाने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति के कारण न्यायालय ने दोनों याचिकाओं को *“अभियोजन के अभाव में” (for want of prosecution)* खारिज कर दिया।
इन दोनों याचिकाओं में कुल *38 याचिकाकर्ता* शामिल थे—WPC No. 2680 of 2024 में 26 तथा WPC No. 2682 of 2024 में 12 याचिकाकर्ता।
*वैज्ञानिक साक्ष्यों ने USTR के पक्ष को मजबूती प्रदान की*
USTR द्वारा तैयार कानूनी प्रतिवाद में *वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्यों*, विशेष रूप से उपग्रह चित्रों तथा तकनीकी सर्वेक्षणों पर विशेष जोर दिया गया।
ISRO की उपग्रह इमेजरी* तथा उसके बाद किए गए ड्रोन/स्थलीय सर्वेक्षणों का उपयोग वन भूमि पर कब्जे की समय-सीमा और विस्तार को स्थापित करने के लिए किया गया। विभाग का पक्ष था कि संबंधित भूमि पर कब्जा 13 दिसंबर 2005 की वैधानिक कट-ऑफ तिथि के बाद* हुआ, जो वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत वन अधिकारों की मान्यता के लिए महत्वपूर्ण तिथि है।
मई 2023 में अंतिम बेदखली की कार्रवाई से पूर्व, अतिक्रमणकारियों को *अप्रैल एवं मई 2023 में कारण बताओ नोटिस* जारी किए गए थे। इन नोटिसों के साथ संबंधित उपग्रह चित्र एवं सर्वेक्षण संबंधी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई थी, ताकि उन्हें उनके कब्जे से संबंधित साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।
विभागीय अभिलेखों में यह भी दर्ज है कि वन अधिकारों से संबंधित दावों पर *26 जुलाई 2024 को आयोजित ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति* की बैठक में विचार किया गया तथा दावेदारों द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत अपेक्षित कब्जे एवं वन पर निर्भरता की आवश्यक शर्तों को प्रमाणित करने में विफल रहने के आधार पर दावों को अस्वीकार किया गया।
*USTR का निरंतर प्रभावी प्रवर्तन अभियान*
यह घटनाक्रम USTR द्वारा वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे व्यापक एवं निरंतर अभियान का हिस्सा है।
वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष हुई कार्यवाही में राज्य की ओर से यह तथ्य रखा गया था कि USTR के *छह प्रमुख क्षेत्रों में 276 व्यक्तियों को बेदखल कर 595.76 हेक्टेयर अतिक्रमित वन भूमि को पुनः प्राप्त किया गया। न्यायालय के समक्ष यह भी दर्ज किया गया कि स्थानीय परिवारों द्वारा अतिक्रमित भूमि को स्वेच्छा से खाली किए जाने के परिणामस्वरूप दो क्षेत्रों में लगभग **110 हेक्टेयर भूमि पुनः प्राप्त* की गई।
USTR की प्रवर्तन कार्रवाई इसके बाद भी जारी रही। वर्ष 2025 में इंदागांव बफर रेंज में की गई एक कार्रवाई में *60.7 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि को सफलतापूर्वक अतिक्रमण मुक्त* कराया गया। इस कार्रवाई में ISRO की उपग्रह इमेजरी का उपयोग यह स्थापित करने के लिए किया गया कि संबंधित अतिक्रमण वर्ष 2008 के बाद प्रारंभ हुआ था।
ISRO/NRSC की उपग्रह इमेजरी, *DGPS-सक्षम ड्रोन मैपिंग, GPS आधारित सर्वेक्षण तथा स्थलीय सत्यापन* के उपयोग ने USTR को अतिक्रमण एवं वन्यजीव आवास के विनाश के विरुद्ध साक्ष्य-आधारित कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है। हालिया रिपोर्टिंग में भी USTR की अतिक्रमण संबंधी जांच में *ISRO CARTOSAT इमेजरी, GPS सर्वेक्षण, DGPS-सक्षम ड्रोन मैपिंग तथा स्थलीय निरीक्षण* के उपयोग का उल्लेख किया गया है।
*कानूनी कार्रवाई और वन्यजीव संरक्षण को मिली गति*
दोनों रिट याचिकाओं के खारिज होने से इन दोनों मामलों में तत्काल लंबित न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई है और संरक्षित वन भूमि पर अनधिकृत कब्जे के विरुद्ध कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की USTR की प्रशासनिक स्थिति और मजबूत हुई है।
वन अतिक्रमण का मुद्दा केवल भूमि पर कब्जे तक सीमित नहीं है। अवैध कब्जे और उसके बाद वन क्षेत्र की कटाई से *वन्यजीवों के आवास का विनाश, प्राकृतिक वन आवरण की हानि तथा महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास में व्यवधान* उत्पन्न हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप *मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ सकती है*। इसलिए USTR के दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों के लिए प्रभावी प्रवर्तन अत्यंत आवश्यक है।
विभाग द्वारा अपनाई गई व्यवस्थित रणनीति—जिसमें *कानूनी कार्रवाई, वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों की जांच, उपग्रह आधारित साक्ष्य, ड्रोन सर्वेक्षण, स्थलीय सत्यापन तथा वन अपराधों से संबंधित कार्यवाही* शामिल है—यह दर्शाती है कि USTR वास्तविक एवं पात्र वन अधिकारों का सम्मान करते हुए संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे को रोकने और वन्यजीव आवास की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
WPC 2682 of 2024 Gohramal encroachment
WPC 2680 of 2024 Gohramal encroachment



