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रायपुर। रक्षाबंधन का पर्व जहां भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और भावनाओं का प्रतीक माना जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में इस पवित्र दिन दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। एक घटना रायपुर के महादेव घाट की है, जहां अपनी दिवंगत बहन की अस्थियां विसर्जित करने पहुंचे 35 वर्षीय भाई युधिष्ठिर सारंग खारून नदी के तेज बहाव में बह गए। दूसरी घटना माइंस प्रभावित क्षेत्र के ग्राम फूलपाड़ की है, जहां गंभीर बीमारी से जूझ रहे 12 वर्षीय छात्र हेमराज की मौत के बाद उसकी बहनों ने अंतिम संस्कार से पहले उसके शव को राखी बांधी।
दोनों घटनाओं में भाई-बहन के रिश्ते की भावनाएं दर्दनाक परिस्थितियों में सामने आईं। महादेव घाट की घटना में परिवार पहले ही एक बेटी को खो चुका था और बहन की अस्थियां लेकर घाट पहुंचा था, लेकिन वहां परिवार के एक और सदस्य के साथ हादसा हो गया। वहीं, फूलपाड़ में रक्षाबंधन के दिन जिस भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी थी, उसकी मौत के बाद बहनों ने उसके शव पर राखी बांधी।
बहन की अस्थियां विसर्जित करने पहुंचे थे युधिष्ठिर
रायपुर के सतनामी पारा निवासी 35 वर्षीय युधिष्ठिर सारंग अपनी बहन गीतेश्वरी की अस्थियां विसर्जित करने के लिए परिवार के साथ महादेव घाट पहुंचे थे। गीतेश्वरी का कुछ दिन पहले निधन हुआ था। परिवार के लिए यह समय पहले से ही बेहद भावुक था, लेकिन रक्षाबंधन के दिन घाट पर हुआ हादसा उनके लिए दूसरी बड़ी त्रासदी बन गया।
जानकारी के मुताबिक, अस्थि विसर्जन के बाद युधिष्ठिर और उनके जीजा रामेश्वर नदी में नहाने के लिए उतरे। इसी दौरान दोनों गहरे पानी की ओर चले गए। वहां नदी के तेज बहाव और एनीकट के आसपास बने भंवर के कारण स्थिति बेहद खतरनाक हो गई।
स्थानीय मछुआरों ने तत्परता दिखाते हुए रामेश्वर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन युधिष्ठिर पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए और एनीकट के पास डूब गए। घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों और परिजनों में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना पुलिस और एसडीआरएफ को दी गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एसडीआरएफ की टीम ने नदी में तलाश शुरू की थी। परिजनों ने रेस्क्यू टीम के मौके पर पहुंचने में देरी को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
आठ भाइयों की इकलौती बहन थी गीतेश्वरी
युधिष्ठिर की बहन गीतेश्वरी परिवार में आठ भाइयों की इकलौती बहन थीं। परिवार के लिए वह बेहद खास थीं। परिजनों के मुताबिक, गीतेश्वरी अपने भाइयों से बेहद करीब थीं और उनकी मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में था।
परिवार के एक सदस्य ने बताया कि गीतेश्वरी उनसे करीब 10 साल छोटी थीं और उनकी शादी करीब दो साल पहले हुई थी। रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद भाई युधिष्ठिर समेत परिवार के लोग उनकी अस्थियां लेकर महादेव घाट पहुंचे थे।
किसी ने शायद नहीं सोचा था कि बहन की अस्थियां विसर्जित करने गया भाई भी उसी नदी में हादसे का शिकार हो जाएगा।
रायपुर के महादेव घाट में इस हादसे की अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नदी में पानी की गहराई, तेज बहाव और एनीकट के नीचे बने भंवर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा।
दूसरी घटना में भाई के शव पर बहनों ने बांधी राखी
रक्षाबंधन के दिन दूसरी मार्मिक घटना माइंस प्रभावित क्षेत्र के ग्राम फूलपाड़ में सामने आई। यहां 12 वर्षीय स्कूली छात्र हेमराज कुम्ही की गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई।
हेमराज कक्षा सातवीं का छात्र था। बताया गया कि वह दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। उसकी तबीयत 26 अगस्त को बिगड़ी थी। परिवार उसे इलाज के लिए बीएसपी द्वारा संचालित अस्पताल लेकर गया, लेकिन वहां एंबुलेंस खराब होने की बात सामने आई।
परिवार के मुताबिक, मजबूरी में निजी वाहन से हेमराज को रामकृष्ण अस्पताल, नारायणपुर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया।
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से छात्र को रेफर कराने और वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बाद परिवार ने निजी साधनों से बच्चे को ले जाने का प्रयास किया।
हालांकि, इलाज के बीच हेमराज की मौत हो गई। रक्षाबंधन के दिन परिवार में जहां बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी कर रही थीं, वहीं उन्हें अपने भाई के शव पर राखी बांधनी पड़ी।
रोती बहनों ने अंतिम विदाई से पहले बांधी राखी
हेमराज की मौत के बाद उसकी बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बजाय उन्होंने उसके शव पर राखी बांधी और अंतिम संस्कार के लिए उसे विदा किया।
यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के प्रेम के पर्व पर परिवार को इस तरह की अंतिम विदाई देनी पड़ी।
हेमराज की मौत ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और परिवहन की व्यवस्था मिल जाती तो शायद बच्चे को बचाने की संभावना बन सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल
दोनों घटनाओं ने अलग-अलग स्तर पर प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। महादेव घाट की घटना ने नदी किनारे सुरक्षा और रेस्क्यू व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि फूलपाड़ की घटना ने दूरदराज के इलाकों में गंभीर मरीजों के लिए तत्काल एंबुलेंस और बेहतर चिकित्सा सुविधा की जरूरत को सामने ला दिया है।
महादेव घाट पर हर साल बड़ी संख्या में लोग धार्मिक अनुष्ठान और अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर गहरे पानी, तेज बहाव और भंवर वाले हिस्सों को लेकर चेतावनी, बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों और तत्काल रेस्क्यू सुविधा की आवश्यकता रहती है।
वहीं, ग्रामीण और माइंस प्रभावित इलाकों में गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर बच्चों और हृदय संबंधी गंभीर बीमारी वाले मरीजों के मामले में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदलीं
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने इसी पर्व को दो परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बना दिया।
एक परिवार अपनी बेटी और बहन की अस्थियां विसर्जित करने गया था, लेकिन वहां भाई हादसे का शिकार हो गया। दूसरे परिवार में जिस भाई की कलाई पर राखी सजनी थी, उसकी मौत के बाद बहनों ने उसके शव पर राखी बांधी।
इन घटनाओं ने एक ओर भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और भावनाओं को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महादेव घाट की घटना में रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर लगाए गए परिजनों के आरोपों और फूलपाड़ मामले में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

