पलारी। स्वास्थ्य विभाग में कथित फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर ग्रामीण चिकित्सा सहायक के स्थानांतरण का आदेश तैयार किया गया। मामले की जांच के बाद पलारी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई है। वहीं, गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने भी दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी के पद से हटा दिया है।
फर्जी हस्ताक्षर से तैयार किया गया ट्रांसफर ऑर्डर
मामला पलारी क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन के कथित स्थानांतरण से संबंधित एक आदेश सामने आया था। बताया गया कि 17 अगस्त 2026 को तैयार किए गए इस आदेश में CMHO डॉ. राजेश अवस्थी के हस्ताक्षर किए गए थे।
आदेश की प्रति लेकर संबंधित कर्मचारी पलारी के बीएमओ कार्यालय पहुंचा। वहां अधिकारियों को आदेश की सत्यता को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद मामले की जानकारी जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तक पहुंचाई गई।
जब CMHO डॉ. राजेश अवस्थी से आदेश के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने आदेश पर किए गए हस्ताक्षर को अपना नहीं बताया। इसके बाद प्रथम दृष्टया मामला फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर का दुरुपयोग करने से जुड़ा पाया गया।
जांच में खुलने लगी फर्जीवाड़े की परतें
CMHO की ओर से आदेश को फर्जी बताए जाने के बाद मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के साथ ही पूरे घटनाक्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर मामले में भाजपा नेताओं समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। इसके बाद पलारी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल, करण कुमार देवांगन और कसडोल के आरएमओ रवि सेन के नाम समाचार में बताए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
भाजपा ने दोनों नेताओं को पद से हटाया
मामले में भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पार्टी संगठन ने भी सख्त रुख अपनाया है। समाचार के मुताबिक भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर कृष्णा अवस्थी और पुनीराम पटेल को पार्टी के पद से तत्काल हटा दिया।
पार्टी की ओर से इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की आपराधिक या अनुशासनहीन गतिविधि में संलिप्तता सामने आने पर संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
CMHO ने फर्जी हस्ताक्षर की पुष्टि की
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु CMHO के हस्ताक्षर से जुड़ा है। बताया गया है कि जब स्थानांतरण आदेश की प्रति CMHO के सामने रखी गई तो उन्होंने उस पर किए गए हस्ताक्षर को अपना नहीं माना।
इसके बाद संबंधित आदेश की सत्यता पर सवाल उठे। सरकारी अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल करते हुए कथित तौर पर तैयार किए गए आदेश को लेकर विभागीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी आदेश तैयार करने का उद्देश्य क्या था और इसके पीछे किस तरह का लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही थी।
ट्रांसफर कराने के लिए बनाया गया था दबाव?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पूरा मामला एक ग्रामीण चिकित्सा सहायक के कथित स्थानांतरण से जुड़ा है। हालांकि, फर्जी आदेश तैयार करने के पीछे वास्तविक उद्देश्य और इसकी पूरी साजिश का खुलासा पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी आदेश किसने तैयार किया, उसमें CMHO के हस्ताक्षर किस तरह लगाए गए और यह आदेश संबंधित कार्यालय तक कैसे पहुंचा।
इसके अलावा पुलिस कथित तौर पर यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में आर्थिक लेन-देन हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने सरकारी विभागों में जारी होने वाले स्थानांतरण और प्रशासनिक आदेशों की सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर कथित रूप से फर्जी आदेश तैयार किया जाना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।
ऐसे मामलों में यदि दस्तावेज की समय रहते जांच नहीं की जाए तो फर्जी आदेश के आधार पर किसी कर्मचारी की पदस्थापना या स्थानांतरण भी कराया जा सकता है। इसलिए पुलिस जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग में भी इस मामले को लेकर दस्तावेजी प्रक्रिया की समीक्षा की जा सकती है।
चारों आरोपियों को भेजा गया जेल
पलारी थाना पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार न्यायालय से आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने की पूरी योजना किसकी थी, दस्तावेज तैयार करने में किसने भूमिका निभाई और इसका लाभ किसे मिलने वाला था।
मामले में आगे की जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेज, मोबाइल फोन और आरोपियों के बीच हुई बातचीत जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

