रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ में परीक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला पेपर लीक का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) से जुड़ी बीएससी कृषि की परीक्षा के प्रश्नपत्र को लीक करने के आरोप में दुर्ग के एक निजी कृषि कॉलेज के प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रोफेसर ने सीलबंद लिफाफा खोले बिना उसमें बेहद बारीक छेद किया और मेडिकल जांच में इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोपी कैमरे को अंदर डालकर प्रश्नपत्र का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री हाथ से लिखकर छात्रों को कथित तौर पर 11-11 हजार रुपये में बेची गई।
सीलबंद लिफाफा बना पेपर लीक का जरिया
पुलिस के अनुसार इस मामले का मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया है, जो दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में वर्ष 2019 से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। उसका विश्वविद्यालय से परीक्षा संबंधी काम के सिलसिले में संपर्क रहता था। वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए रायपुर स्थित कृषि महाविद्यालय आता था।
पुलिस जांच के मुताबिक 17 अगस्त को योगेश रायपुर के जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा था। वहां उसने उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के साथ आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए। सभी प्रश्नपत्र कॉलेज पहुंचाने के बाद उसने 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र यानी Entomology परीक्षा का प्रश्नपत्र वाला सीलबंद लिफाफा अपने घर ले जाने की कथित साजिश रची।
सुई और नुकीले उपकरण से किया लिफाफे में छेद
घर पहुंचने के बाद आरोपी ने सीलबंद लिफाफे को सीधे खोलने के बजाय उसमें सुई और नुकीले उपकरण की मदद से बेहद छोटा छेद किया। इसके बाद करीब ढाई हजार रुपये में खरीदे गए एंडोस्कोपी कैमरे को उस छेद के जरिए लिफाफे के अंदर पहुंचाया और प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। पुलिस ने जांच के दौरान कैमरा, केबल और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं।
इस तरीके का उद्देश्य यह था कि लिफाफे की सील बाहर से सुरक्षित दिखाई देती रहे और प्रश्नपत्र की जानकारी भी हासिल कर ली जाए। रिकॉर्डिंग के बाद प्रश्नपत्र के सवालों को हाथ से कॉपी किया गया। इसके बाद कथित तौर पर इसे छात्रों तक पहुंचाया गया।
11 हजार रुपये में बेचा गया पेपर
जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र की सामग्री को आरोपी प्रोफेसर ने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक समेत अन्य छात्रों को करीब 11 हजार रुपये में बेचा। इसके बाद अजय नायक ने कथित तौर पर यह सामग्री आगे अन्य छात्रों तक पहुंचाई। पुलिस के अनुसार पेपर आगे त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचा।
परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी छात्रों के बीच व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने लगी। विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज प्रबंधन को जब पेपर लीक होने की जानकारी मिली तो मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा स्थगित करने की कार्रवाई की गई और पुलिस को शिकायत दी गई।
36 घंटे में पुलिस ने खोला पूरा नेटवर्क
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान सबसे पहले अनुज मिंज को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उससे पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीमों ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और कबीरधाम सहित अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी।
करीब 36 घंटे की जांच के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में योगेश सोनकेसरिया, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू के नाम सामने आए हैं। पुलिस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
कैमरा, मोबाइल और नकदी समेत कई सामान जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पेपर लीक में इस्तेमाल किए गए कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। इनमें एंडोस्कोपी वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण, मोबाइल फोन, केबल, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपियां, फेविकोल और 11 हजार रुपये नकद शामिल हैं। इन सामानों को जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार मामले में अभी दो अन्य आरोपी फरार हैं। उनकी तलाश में अलग-अलग टीमों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र लीक करने की इस पूरी साजिश में और कितने लोग शामिल थे तथा लीक हुई सामग्री कितने छात्रों तक पहुंची।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों की परीक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा से पहले सीलबंद प्रश्नपत्र एक जिम्मेदार व्यक्ति के पास उसके घर तक कैसे पहुंचा और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कहां चूक हुई।
सामान्य तौर पर प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने और परीक्षा शुरू होने तक उनकी गोपनीयता बनाए रखने की व्यवस्था होती है। लेकिन इस मामले में आरोपी ने तकनीक और छोटे उपकरणों का इस्तेमाल कर सीलबंद लिफाफे के अंदर मौजूद प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल कर ली। इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस हो रही है।
छात्रों के भविष्य पर भी असर
पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को होता है जो ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करते हैं। यदि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध हो जाए तो पूरी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होती है। इसी वजह से विश्वविद्यालय को परीक्षा स्थगित करने जैसे कदम उठाने पड़े।
अब पुलिस की जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय आगे प्रभावित परीक्षाओं के लिए क्या व्यवस्था करता है और पेपर लीक के कारण छात्रों को होने वाली परेशानी को किस तरह कम किया जाता है।
दो परीक्षाओं के पेपर लीक की जांच
रिपोर्टों के अनुसार इस मामले की जांच केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय से जुड़ी बीएससी कृषि प्रथम वर्ष की Plant Pathology और द्वितीय वर्ष की Entomology परीक्षा के प्रश्नपत्रों के संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रबंधन यह पता लगाने में जुटे हैं कि कितने प्रश्नपत्रों तक आरोपियों की पहुंच हुई और किन परीक्षाओं की गोपनीयता प्रभावित हुई।
फिलहाल छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में सफलता मिली है। दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की पूछताछ के बाद पेपर लीक की पूरी साजिश, पैसों के लेन-देन और प्रश्नपत्र कितने छात्रों तक पहुंचा—इससे जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में प्रश्नपत्र के सवालों की संख्या को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, इसलिए यहां संख्या को लेकर निश्चित दावा नहीं किया गया है। आरोपियों पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं और मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

