रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर बड़ा हस्तक्षेप किया है। हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से प्रभावित सफल अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्होंने JPSC की परीक्षाएं पास करने के बाद विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति हासिल की थी। राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मद्देनजर कई परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था। इस फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
342 सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर असर
11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कुल 342 अभ्यर्थी सफल हुए थे और उन्हें विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया था। कई अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद अपनी सेवाएं भी दे रहे थे। सरकार के रद्दीकरण आदेश के बाद इनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां एक साथ रद्द करना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार के आदेश को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। अदालत ने सरकार की ओर से जारी रद्दीकरण संबंधी अधिसूचना पर फिलहाल रोक लगाते हुए राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2:15 बजे निर्धारित की गई है।
कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह है कि फिलहाल सरकार के उस फैसले को लागू नहीं किया जा सकेगा, जिसके तहत संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द किया गया था। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है और आगे की सुनवाई में अदालत पूरे मामले पर विस्तृत विचार करेगी।
22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला
झारखंड सरकार ने छात्रों के लंबे आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के बीच 2014 से अब तक आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके अलावा कई अन्य परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी कही गई थी। सरकार के इस फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों के बीच विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गई।
अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो जांच के बाद दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों को सामूहिक रूप से दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन के बीच आया फैसला
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन कई दिनों से चल रहा था। सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया था। इसी दौरान सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस पूरे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जहां सफल अभ्यर्थियों को राहत मिली है, वहीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आगे क्या होगा?
अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार अपना जवाब और संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करने होंगे। इसके बाद अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि सरकार के रद्दीकरण आदेश पर लगी रोक को आगे जारी रखा जाए या मामले में कोई अन्य आदेश दिया जाए।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा से चयनित अभ्यर्थियों और संबंधित नियुक्तियों पर मंडरा रहा तत्काल संकट टल गया है, लेकिन विवाद का अंतिम समाधान अगली न्यायिक सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

