गिरीश गुप्ता गरियाबंद/छुरा। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा अंचल में बारिश और सावन के मौसम के बावजूद रेत उत्खनन और परिवहन का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सुबह होने से पहले ही नदी घाटों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही शुरू हो जाती है और बड़ी मात्रा में रेत निकालकर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी जा रही है। मामले की तस्वीरें सामने आने के बाद नदी घाटों पर प्रशासन और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सुबह होने से पहले नदी घाटों पर पहुंच रहे ट्रैक्टर
स्थानीय लोगों के मुताबिक छुरा क्षेत्र में रेत परिवहन का काम कथित तौर पर तड़के ही शुरू हो जाता है। सुबह करीब 5 बजे से पहले ही कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां नदी घाटों तक पहुंच जाती हैं। इसके बाद नदी के रेत क्षेत्र से ट्रैक्टरों में रेत भरकर अलग-अलग ग्रामीण और नगरीय इलाकों की ओर ले जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक सूखा नदी, एनीकट क्षेत्र, हरदी, बोड़राबांधा, रानीपरतेवा, मुड़ागांव और रक्सी सहित आसपास के क्षेत्रों में रेत उत्खनन की गतिविधियों की शिकायत सामने आई है।
नदी के भीतर दिखाई दिए कई ट्रैक्टर
मौके से सामने आई तस्वीरों में नदी के रेत वाले हिस्से में एक साथ कई ट्रैक्टर खड़े दिखाई दे रहे हैं। कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेत भरी जा रही है, जबकि मजदूर भी रेत उठाते नजर आ रहे हैं।
इन तस्वीरों के बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत उठाने की गतिविधि होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि किसी विशेष घाट पर रेत उत्खनन वैध है या अवैध, यह संबंधित विभाग के रिकॉर्ड, अनुमति और परिवहन दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
खनिज और राजस्व विभाग की निगरानी पर सवाल
नदी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों की मौजूदगी के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग नियमित रूप से नदी घाटों का निरीक्षण करे तो रेत उत्खनन और परिवहन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी घाट पर रेत उत्खनन की अनुमति नहीं है तो इतने सारे वाहन नदी के भीतर तक कैसे पहुंच रहे हैं? वहीं यदि किसी घाट पर वैध अनुमति है, तो निर्धारित मात्रा और परिवहन व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की जा रही है?
कार्रवाई की भनक लगते ही गतिविधियां बंद होने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि जब विभागीय कार्रवाई की जानकारी रेत कारोबार से जुड़े लोगों को मिलती है तो कुछ समय के लिए गतिविधियां बंद कर दी जाती हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यदि ऐसा हो रहा है तो यह भी जांच का विषय बन सकता है कि विभागीय कार्रवाई की सूचना संबंधित लोगों तक कैसे पहुंच रही है।
नदी और ग्रामीण सड़कों पर असर की आशंका
लगातार और अनियंत्रित तरीके से रेत निकाले जाने से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और नदी तटों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं रेत से लदे ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों पर धूल उड़ने और स्थानीय लोगों को परेशानी होने की शिकायत भी सामने आई है।
धूल के कारण दोपहिया वाहन चालकों और अन्य राहगीरों के लिए परेशानी बढ़ने के साथ सड़क दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, एसडीएम, तहसीलदार और खनिज विभाग से संबंधित नदी घाटों का निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर रेत से जुड़े वाहनों के ई-टीपी, अभिवहन पास, रेत के स्रोत और उत्खनन की अनुमति की जांच करनी चाहिए।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित वाहन मालिकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल सामने आई तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों से नदी घाटों पर रेत उत्खनन और परिवहन का मामला जरूर सामने आया है, लेकिन किसी गतिविधि को अवैध घोषित करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा अनुमति, ई-टीपी और अन्य दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और खनिज विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या संबंधित नदी घाटों का मौके पर निरीक्षण कर रेत उत्खनन की वैधता की जांच की जाती है।
मुख्य बिंदु:
- छुरा अंचल में सावन के दौरान भी रेत उत्खनन की शिकायत।
- सुबह होने से पहले नदी घाटों पर ट्रैक्टर पहुंचने का दावा।
- सूखा नदी समेत कई क्षेत्रों में रेत उत्खनन की शिकायत।
- नदी के भीतर कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिखाई देने की बात।
- खनिज और राजस्व विभाग की निगरानी पर सवाल।
- स्थानीय लोगों ने ई-टीपी और अभिवहन पास की जांच की मांग की।
- अवैधता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही होगी।

