अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान भारत योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में इलाज के दौरान जिस पुलिस आरक्षक की 30 जून 2026 को मौत हो गई थी, उसके मोबाइल पर करीब 37 दिन बाद ‘आप स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं’ का संदेश पहुंचा। इतना ही नहीं, आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में आरक्षक को 42 दिन तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया और डिस्चार्ज की तारीख 6 अगस्त दर्ज है।
26 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था
जानकारी के मुताबिक, जशपुर जिले के ग्राम कटंगखार निवासी पुलिस आरक्षक देवनारायण राम की तबीयत खराब होने पर उनकी पत्नी सीमा कुजूर उन्हें 26 जून को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचीं। यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका उपचार शुरू हुआ।
आरक्षक की हालत गंभीर थी और उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था। लेकिन इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार को अस्पताल की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया था।
मौत के 37 दिन बाद आया मैसेज
मामले ने तब तूल पकड़ा जब 6 अगस्त को आरक्षक के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी की ओर से संदेश पहुंचा, जिसमें उन्हें बताया गया कि वे स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। संदेश में अस्पताल में भर्ती होने की तारीख 26 जून और डिस्चार्ज की तारीख 6 अगस्त दर्ज थी।
यानी जिस व्यक्ति की मौत 30 जून को हो चुकी थी, उसके नाम पर रिकॉर्ड में करीब 42 दिन तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। मृत्यु के करीब 37 दिन बाद आया यह संदेश परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रहा।
पत्नी ने उठाए गंभीर सवाल
मृतक आरक्षक की पत्नी सीमा कुजूर स्वयं स्टाफ नर्स हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर वीडियो जारी कर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उनका सवाल है कि जब उनके पति की 30 जून को मृत्यु हो चुकी थी और मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया था, तो आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उन्हें 6 अगस्त तक भर्ती कैसे दिखाया गया? साथ ही, मृत व्यक्ति के मोबाइल पर स्वस्थ होकर घर लौटने का संदेश आखिर किस प्रक्रिया के तहत भेजा गया?
सीमा कुजूर ने इसे केवल तकनीकी गलती मानने पर भी सवाल उठाया और पूरे मामले की जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?
मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के सीएस आरसी आर्या का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने बताया कि यह ऑटो-जनरेटेड मैसेज है और अस्पताल की ओर से सीधे नहीं भेजा गया।
सीएस के मुताबिक, आरक्षक का आयुष्मान कार्ड 30 जून को ही ब्लॉक कर दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मरीज आईसीयू में भर्ती था और आयुष्मान कार्ड से पांच दिन का ही बिल काटा गया है।
उन्होंने माना कि इस तरह का संदेश किसी मृत मरीज के परिवार को मिलना उचित नहीं है और मामले को लेकर रायपुर स्थित संबंधित विभाग को पत्र लिखने की बात कही है।
तकनीकी गलती या रिकॉर्ड अपडेट में लापरवाही?
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरक्षक की मृत्यु के बाद भी आयुष्मान रिकॉर्ड में उनकी भर्ती की अवधि क्यों चलती रही और डिस्चार्ज की तारीख 6 अगस्त क्यों दर्ज हुई।
अस्पताल प्रबंधन इसे ऑटो-जनरेटेड संदेश बता रहा है, जबकि मृतक की पत्नी ने रिकॉर्ड और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि रिकॉर्ड में डिस्चार्ज की तारीख किस स्तर से दर्ज हुई और मृतक के संबंध में यह डेटा इतने दिनों तक अपडेट क्यों नहीं हुआ।
मामले की वास्तविक जिम्मेदारी और तकनीकी गड़बड़ी का कारण संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

