Sutlej Flood News: पंजाब विधानसभा में सतलुज नदी से जुड़े बाढ़ सुरक्षा इंतजामों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। विधानसभा में सतलुज नदी के किनारे बसे गांवों और कृषि क्षेत्रों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी सरकार से मांगी गई। इस दौरान सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में किए जा रहे सुरक्षा कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी गई।
सतलुज किनारे बाढ़ के खतरे पर विधानसभा में चर्चा
मानसून के दौरान सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से पंजाब के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है। खासकर नदी के आसपास बसे गांवों और कृषि क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने से फसलों और संपत्ति को नुकसान होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए विधानसभा में सतलुज नदी से जुड़े बाढ़ सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाया गया।
विधायकों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि बाढ़ आने से पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों में जरूरी सुरक्षा उपाय पूरे कर लिए जाएं। साथ ही तटबंधों, स्पर्स और अन्य बाढ़ सुरक्षा ढांचों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत पर भी जोर दिया गया।
32.09 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य
पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में बाढ़ से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। ब्यास और सतलुज नदियों के संवेदनशील हिस्सों में करीब 32.09 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं।
सरकार के अनुसार, इन कार्यों में से 12 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि एक कार्य अभी प्रगति पर है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण होने वाले कटाव को रोकना तथा आसपास के गांवों और कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है।
संवेदनशील इलाकों का कराया गया सर्वे
सरकार की ओर से बताया गया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया है। इसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों की टीमों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा उपायों की सिफारिश की।
इन तकनीकी सिफारिशों के आधार पर उन स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां बाढ़ और नदी के कटाव का खतरा ज्यादा है। सरकार का कहना है कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
मनरेगा के तहत भी हुए बाढ़ सुरक्षा कार्य
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों में मनरेगा का भी उपयोग किया गया है। इसके तहत करीब 11.98 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए हैं।
इसके अलावा फिरोजपुर के ममदोट क्षेत्र में सतलुज नदी के किनारे करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से नए स्पर्स, लगभग 700 फीट जियो-बैग रिवेटमेंट और पांच स्टड बनाए गए हैं। इन संरचनाओं का उद्देश्य नदी के तेज बहाव और कटाव से प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करना है।
किसानों की जमीन और फसलों की सुरक्षा भी अहम
सतलुज नदी के आसपास बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। बाढ़ आने की स्थिति में खेतों में पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा नदी के कटाव के कारण कृषि भूमि के प्रभावित होने का खतरा भी बना रहता है।
ऐसे में बाढ़ सुरक्षा कार्य केवल आबादी की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की जमीन, फसल और आजीविका को सुरक्षित रखने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत पर भी जोर
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। इसे केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
मानसून के दौरान सतलुज नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के साथ-साथ कमजोर तटबंधों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समय रहते सुरक्षा कार्य पूरे होने से बाढ़ की स्थिति में संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
सतलुज नदी से बाढ़ के खतरे को देखते हुए पंजाब विधानसभा में उठाया गया यह मुद्दा नदी किनारे बसे गांवों और किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों के साथ संवेदनशील इलाकों की निगरानी और क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत पर जोर दिया जा रहा है। अब इन कार्यों को मानसून से पहले समय पर पूरा करना प्रशासन के सामने अहम चुनौती है।

