रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। राज्य सरकार करीब 54 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक सरकारी स्कूल का निर्माण करा रही है। यह स्कूल नवंबर 2026 तक तैयार होने की संभावना है। खास बात यह है कि इस स्कूल में सिर्फ प्रदेश के ही नहीं, बल्कि विदेशी नागरिकों के बच्चे भी प्रवेश लेकर पढ़ाई कर सकेंगे। आधुनिक सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक वातावरण के कारण इसे राज्य के सबसे उन्नत सरकारी स्कूलों में शामिल किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
रायपुर में बन रहा यह नया सरकारी स्कूल आधुनिक शिक्षा प्रणाली को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। भवन का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है और सरकार का लक्ष्य है कि नवंबर 2026 तक इसे पूरी तरह तैयार कर शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कर दी जाएं।
स्कूल में डिजिटल क्लासरूम, अत्याधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर लैब, स्मार्ट लाइब्रेरी, खेल परिसर, ऑडिटोरियम, इनडोर-आउटडोर स्पोर्ट्स सुविधाएं, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
विदेशी बच्चे भी क्यों पढ़ सकेंगे?
रायपुर में बड़ी संख्या में विभिन्न देशों की कंपनियों, दूतावासों से जुड़े अधिकारी, उद्योगों में कार्यरत विदेशी विशेषज्ञ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े लोग रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल को ऐसा स्वरूप दिया जा रहा है, जहां निर्धारित नियमों के तहत विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी प्रवेश दिया जा सके।
सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय विद्यार्थियों को भी अंतरराष्ट्रीय माहौल मिलेगा और विभिन्न संस्कृतियों के बीच सीखने का अवसर मिलेगा।
54 करोड़ रुपये क्यों खर्च किए जा रहे हैं?
सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को निजी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूलों के बराबर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए भवन निर्माण, आधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, खेल सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य शैक्षणिक संसाधनों पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है।
यह परियोजना नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
छात्रों को क्या मिलेगा?
स्कूल में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा के साथ-साथ खेल, विज्ञान, नवाचार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। डिजिटल बोर्ड, हाई-स्पीड इंटरनेट, ई-लाइब्रेरी, रोबोटिक्स एवं STEM आधारित शिक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन कैंपस, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा दक्ष तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।
कब तक होगा तैयार?
निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अधिकारियों के अनुसार नवंबर 2026 तक भवन पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार की क्या उम्मीद है?
राज्य सरकार का मानना है कि यह स्कूल सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक मॉडल संस्थान बनेगा। यहां मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं छात्रों को बेहतर शिक्षा के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगी। साथ ही यह परियोजना भविष्य में प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के उन्नयन के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

