नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए श्रद्धा के अंतिम संस्कार के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले का ट्रायल पहले से ही रोजाना (डे-टू-डे) आधार पर चल रहा है, इसलिए इस स्तर पर अलग से कोई समयसीमा तय करने की आवश्यकता नहीं है।
श्रद्धा वालकर के परिजनों की ओर से अदालत में याचिका दायर कर अनुरोध किया गया था कि ट्रायल जल्द पूरा कराया जाए ताकि साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे गए अवशेष परिजनों को सौंपे जा सकें और उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। परिजनों का कहना था कि कई वर्षों से वे अंतिम संस्कार नहीं कर पाए हैं, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई नियमित रूप से चल रही है और पहले ही इसे तेजी से आगे बढ़ाने के लिए डे-टू-डे आधार पर सूचीबद्ध किया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट की ओर से अलग समय-सीमा निर्धारित करना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार सुनवाई जारी रखेगा।
यह मामला मई 2022 का है, जब श्रद्धा वालकर की कथित तौर पर उनके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने हत्या कर दी थी। अभियोजन के अनुसार हत्या के बाद शव के कई टुकड़े कर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंका गया था। पुलिस ने जांच के दौरान कई अवशेष बरामद किए, जिन्हें अब भी मुकदमे में साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई लंबे समय से जारी है। हाल के महीनों में ट्रायल कोर्ट ने भी सुनवाई में तेजी लाने के लिए लगातार तारीखें तय की हैं, ताकि गवाहों के बयान जल्द पूरे हो सकें और मुकदमे का निस्तारण समय पर हो सके।

