रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। विभाग पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि एक ओर गोपनीय चरित्रावली (सीआर/एसीआर) उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर कई पात्र शिक्षकों की पदोन्नति रोक दी गई, जबकि दूसरी ओर कुछ अपात्र अधिकारियों को नियमों में ढील देकर प्रमोट कर दिया गया।
अब अगस्त महीने में स्नातक प्राचार्य (प्रिंसिपल) के 292 पदों पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक प्रस्तावित है। इसके लिए पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। ऐसे में पहले हुई पदोन्नतियों को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
एसीआर नहीं होने पर रोकी गई पदोन्नति
जानकारी के अनुसार, विभाग ने कई शिक्षकों को यह कहते हुए पदोन्नति से वंचित रखा कि उनकी गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) उपलब्ध नहीं है। जबकि इस संबंध में हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि विभाग की लापरवाही से सीआर उपलब्ध नहीं हो पाती और कर्मचारी की कोई गलती नहीं है, तो केवल इसी आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती।
हाईकोर्ट का हवाला
4 मई 2026 को डॉ. मीना क्षेत्रपाल मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि विभाग समय पर सीआर उपलब्ध नहीं करा सका और कर्मचारी ने कोई जानकारी नहीं छिपाई है, तो उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद विभाग पर पुराने तरीके से पात्र उम्मीदवारों को रोकने के आरोप लग रहे हैं।
अवैतनिक अवकाश के बावजूद मिली वरिष्ठता
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 की डीपीसी में 792 पात्र अधिकारियों में से केवल 26 को पदोन्नति मिली थी, जबकि बड़ी संख्या में अधिकारी वंचित रह गए। बाद में 29 मई 2025 की सूची में 302 अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया।
आरोप यह भी है कि कुछ अधिकारियों को अवैतनिक अवकाश के बावजूद वरिष्ठता का लाभ देकर पदोन्नति दे दी गई। आज इनमें से कई अधिकारी प्राचार्य, संयुक्त संचालक और अतिरिक्त संचालक जैसे पदों पर कार्यरत हैं, जबकि उनसे वरिष्ठ कई अधिकारी अब भी निचले पदों पर कार्य कर रहे हैं।
अगस्त में होगी नई डीपीसी
उच्च शिक्षा विभाग ने अगस्त में स्नातक प्राचार्य के 292 पदों पर डीपीसी आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि इस बार सभी पात्र दावेदारों के मामलों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त जीतू यादव के अनुसार, डीपीसी का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और बैठक अगस्त में होने की संभावना है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- सीआर नहीं होने का खामियाजा पात्र शिक्षकों को क्यों भुगतना पड़ा?
- जिन मामलों में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए, उनका पालन क्यों नहीं हुआ?
- अपात्र अधिकारियों को नियमों में छूट देकर पदोन्नति कैसे दी गई?
- क्या नई डीपीसी में सभी पात्र उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार होगा?
उच्च शिक्षा विभाग में पदोन्नति को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के समान अनुपालन पर भी बहस छेड़ रहे हैं। आने वाली डीपीसी पर हजारों शिक्षकों और अधिकारियों की नजरें टिकी हैं।

