रायपुर। बस्तर संभाग में मलेरिया से दो मासूम बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि राज्य शासन ने पहले ही सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को मच्छरदानी खरीदकर वितरण करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकांश जिलों में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। नतीजा यह रहा कि मलेरिया प्रभावित गांवों तक समय पर मच्छरदानियां नहीं पहुंच सकीं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस वर्ष केंद्र सरकार की ओर से मच्छरदानियों की आपूर्ति नहीं हो सकी थी। ऐसे में राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया था कि वे सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) मद से मच्छरदानियां खरीदकर प्रभावित गांवों में वितरित करें। हालांकि, किसी भी जिले ने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की।
दो बच्चों की मौत के बाद अब पूरा मामला सुर्खियों में है। स्वास्थ्य विभाग इलाज और जांच की प्रक्रिया का रिकॉर्ड पेश कर रहा है, लेकिन इस बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले से निर्देश जारी थे, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री ने माना, खरीद नहीं हुई
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि केंद्र से मच्छरदानियां नहीं मिलने के कारण कलेक्टरों को सीएसआर फंड से खरीद करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अब यह समीक्षा की जा रही है कि आखिर किन कारणों से जिलों में खरीद नहीं हो सकी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रक्रिया में कहां चूक हुई।
मंत्री ने बताया कि अब मच्छरदानियों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों में उनका वितरण किया जाएगा।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
मामले के बाद कई अहम सवाल सामने आए हैं—
- जब शासन ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए थे, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ?
- मलेरिया प्रभावित गांवों में मच्छरदानियां समय पर क्यों नहीं पहुंचीं?
- किसी भी जिले ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?
- दो बच्चों की मौत के बाद ही खरीद प्रक्रिया क्यों शुरू की गई?
- लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
मलेरिया नियंत्रण पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में मलेरिया हर वर्ष गंभीर चुनौती बनता है। ऐसे में समय पर मच्छरदानी वितरण, दवाओं की उपलब्धता और जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। दो बच्चों की मौत के बाद अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की समीक्षा और जांच के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

