गिरीश गुप्ता मैनपुर (गरियाबंद)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को अब तक न तो पाठ्यपुस्तकें मिली हैं और न ही गणवेश। ऐसे में छात्र-छात्राएं खाली बस्ता लेकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन मैनपुर विकासखंड के प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूलों में अब तक सभी विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। कई स्कूलों में कुछ विषयों की पुस्तकें ही पहुंची हैं, जबकि अधिकांश छात्र अब भी पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह गणवेश वितरण भी अधूरा है। कई बच्चों को छोटे आकार के कपड़े दिए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को गणवेश मिला ही नहीं है।
अभिभावकों का कहना है कि बिना किताबों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षक भी नियमित पढ़ाई कराने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, क्योंकि विद्यार्थियों के पास पाठ्य सामग्री नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल समय पर किताब और गणवेश उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस बार भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
क्षेत्र के कई पालकों ने बताया कि बच्चे रोज स्कूल तो जा रहे हैं, लेकिन किताबें नहीं होने से वे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। वहीं छोटे आकार के गणवेश मिलने से कई विद्यार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने जल्द से जल्द सभी विद्यार्थियों को किताबें और सही आकार के गणवेश उपलब्ध कराने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि मैनपुर विकासखंड में सैकड़ों शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसके बावजूद अब तक सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा नहीं हो पाया है।
इस संबंध में मैनपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) देवनाथ बघेल का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में पुस्तकें पहुंच चुकी हैं। जहां अब भी किताबें नहीं पहुंची हैं, वहां जल्द आपूर्ति कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गणवेश वितरण का कार्य भी शीघ्र पूरा कराया जाएगा।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक सभी विद्यार्थियों को किताबें और गणवेश नहीं मिल जाते, तब तक शिक्षा व्यवस्था के दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

