गिरीश गुप्ता गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ने नाबालिग को प्रेम और शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था, जिससे वह गर्भवती हो गई थी।
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया कि पीड़िता की मां ने जब अपनी नाबालिग बेटी का पेट बढ़ा हुआ देखा तो उससे पूछताछ की। इस दौरान पीड़िता ने बताया कि आरोपी चंद्रशेखर निषाद उसे प्रेम और शादी का वादा कर घुमाने के बहाने शाम के समय खेत में ले जाता था। वहां उसने कई बार उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसने आरोपी से शादी करने और जिम्मेदारी लेने की बात कही तो उसने अपनाने से इनकार कर दिया।
मामले की शिकायत मिलने पर थाना अमलीपदर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना पूरी होने के बाद तत्कालीन विवेचना अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक गोपाल वैश्य और उपनिरीक्षक दिलीप मेश्राम ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सभी साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी चंद्रशेखर निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषसिद्ध करार दिया। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा तथा ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

