नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा (Third Language) को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब केवल कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि कोई छात्र स्कूल स्तर पर होने वाले तीसरी भाषा के आंतरिक मूल्यांकन (School-Based Assessment) में सफल नहीं होता है, तो उसे कक्षा 10 का पास सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।
CBSE ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तीन-भाषा फार्मूले को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से किया गया है। इसका मकसद छात्रों में भाषाई दक्षता बढ़ाना और मातृभाषा व भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना है।
बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन इंटरनल असेसमेंट अनिवार्य
CBSE के अनुसार तीसरी भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। हालांकि, स्कूल द्वारा कराए जाने वाले इंटरनल असेसमेंट में छात्रों का पास होना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र इस मूल्यांकन में असफल रहता है, तो उसे कक्षा 10 का पास प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा, चाहे उसने अन्य सभी विषयों की बोर्ड परीक्षा पास कर ली हो।
किन छात्रों पर लागू होगा नियम?
यह नियम वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 9 में पढ़ रहे छात्रों पर लागू होगा। यानी जो छात्र वर्ष 2027-28 में कक्षा 10 की परीक्षा देंगे, उन्हें इस नई व्यवस्था का पालन करना होगा।
NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बहुभाषी शिक्षा (Multilingual Education) पर विशेष जोर दिया गया है। इसी के तहत छात्रों को कम से कम तीन भाषाओं का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। CBSE का यह कदम उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह
CBSE ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे तीसरी भाषा को हल्के में न लें। हालांकि इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल आधारित मूल्यांकन में सफलता अनिवार्य होगी। इसलिए नियमित अध्ययन और स्कूल की मूल्यांकन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

