गोवंश बिक्री पर रोक से बढ़ी नाराजगी, किसानों के साथ मुस्लिम कारोबारियों में भी असंतोष
पश्चिम बंगाल में गोवंश की खरीद-बिक्री और परिवहन को लेकर सख्ती बढ़ने के बाद अब इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में किसानों के साथ-साथ पशु कारोबार से जुड़े मुस्लिम समुदाय के लोग भी राज्य सरकार और विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि बूढ़े और अनुपयोगी मवेशियों को बेच पाना अब मुश्किल हो गया है। पहले किसान पुराने गोवंश को बेचकर नए पशु खरीदते थे या खेती-किसानी के दूसरे कामों में पैसा लगाते थे, लेकिन मौजूदा हालात में बाजार ठप पड़ने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई गांवों में आवारा पशुओं की संख्या भी बढ़ने लगी है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।
वहीं दूसरी ओर, पशु व्यापार और परिवहन से जुड़े मुस्लिम कारोबारियों का कहना है कि लगातार जांच, कार्रवाई और सख्त नियमों के कारण उनका कारोबार लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। कारोबारियों का आरोप है कि प्रशासनिक दबाव के चलते मंडियों में खरीदार कम हो गए हैं और कई लोग इस धंधे से बाहर होने को मजबूर हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशु व्यापार से जुड़े लाखों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की “नीतिगत विफलता” बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष कानून व्यवस्था और पशु तस्करी रोकने को प्राथमिकता बता रहा है।
हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस नाराजगी पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बढ़ती असंतोष की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।

