डिब्रूगढ़: ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने असम के डिब्रूगढ़ जिले के तेंगाखाट स्थित अपने ऑयल टैंक फार्म में हुए भीषण विस्फोट और आग की घटना के बाद तीन अधिकारियों और एक कर्मचारी समेत कुल चार लोगों को निलंबित कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता प्रंकुश मल्ला बुजरबरुआ ने बताया कि इन सभी पर आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप है। वहीं, इस घटना में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
6 नवंबर को हुई घटना के तुरंत बाद टेंगाखाट के रूपम गोहेन को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी चोटों की गंभीरता को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उन्हें गुवाहाटी शिफ्ट किया गया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और मौत हो गई।
इससे पहले, इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में से एक इंजीनियर तपस ज्योति गोगोई थे, जो स्पेक्ट्रॉन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में काम करते थे। विस्फोट और आग की घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई थी।
इस बीच, ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस घटना में मरने वालों के परिवारों को 10 लाख रुपए और घायलों को 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं, केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को डिब्रूगढ़ के आस्था अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कंपनी मुख्यालय में ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी भी ली।
बातचीत के दौरान सोनोवाल ने कंपनी से सभी घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और तत्काल जरूरी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की और विस्फोट व आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच करवाने की बात कही। केंद्रीय मंत्री ने घटना के सभी पहलुओं को सामने लाने के लिए विस्तृत जांच की बात की।

