MP हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: आमचूर-गरम मसाले को ड्रग्स समझ कारोबारी को भेजा जेल, अब मिलेगा 10 लाख मुआवज़
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में 57 दिन तक गलत तरीके से जेल में रहे कारोबारी को 10 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि सरकारी एजेंसियों की लापरवाही और फॉरेंसिक जांच में देरी के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा, जो उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला?
मामला भोपाल एयरपोर्ट का है। कारोबारी अजय सिंह मई 2010 में मलेशिया जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे। जांच के दौरान उनके बैग में रखे आमचूर और गरम मसाले के पैकेट को स्कैनिंग मशीन में संदिग्ध पदार्थ माना गया। इसके बाद CISF और पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज कर कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। हालांकि बाद में फॉरेंसिक जांच में साफ हुआ कि जब्त किए गए पैकेट में कोई नशीला पदार्थ नहीं था, बल्कि सामान्य मसाले थे। रिपोर्ट आने में देरी के कारण कारोबारी को पूरे 57 दिन जेल में बिताने पड़े।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए MP हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य की जांच व्यवस्था और फॉरेंसिक सिस्टम की खामियों का खामियाजा एक निर्दोष नागरिक को भुगतना पड़ा। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन माना।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित कारोबारी को तीन महीने के भीतर 10 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए।
सरकार को भी दिए निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रदेश की फॉरेंसिक लैब व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञों की कमी के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिन्हें तत्काल सुधारने की जरूरत है।
इस फैसले को गलत गिरफ्तारी और जांच एजेंसियों की जवाबदेही से जुड़े मामलों में बड़ा संदेश माना जा रहा है।

