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नई दिल्ली: भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के लिए एक अनूठा कदम उठाने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, साल 2026 की गर्मियों की छुट्टियों में देशभर के सभी स्कूलों में 7 दिवसीय ‘भारतीय भाषा समर कैंप’ का आयोजन किया जाएगा।
खेल-खेल में सीखेंगे भाषाएं
इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बोझ मुक्त वातावरण में नई भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। 7 दिनों तक चलने वाले इस कैंप में कुल 28 घंटों का सत्र (प्रतिदिन 4 घंटे) होगा। इसमें छात्र न केवल बोलना सीखेंगे, बल्कि उस भाषा से जुड़ी संस्कृति, लोकगीत और परंपराओं से भी रूबरू होंगे।
इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्रों को बोझ मुक्त वातावरण में नई भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। 7 दिनों तक चलने वाले इस कैंप में कुल 28 घंटों का सत्र (प्रतिदिन 4 घंटे) होगा। इसमें छात्र न केवल बोलना सीखेंगे, बल्कि उस भाषा से जुड़ी संस्कृति, लोकगीत और परंपराओं से भी रूबरू होंगे।
इस साल की खास बातें:
- सांकेतिक भाषा (ISL) पर जोर: इस वर्ष पहली बार भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language) को कैंप के पाठ्यक्रम में विशेष स्थान दिया गया है, ताकि छात्रों में समावेशी सोच विकसित हो सके।
- विशाल भाषाई दायरा: कैंप के लिए 100 से अधिक भाषाई प्राइमर (सीखने की सामग्री) तैयार किए गए हैं। इनमें 17 अनुसूचित भाषाओं के अलावा 81 आदिवासी और 23 गैर-आदिवासी भाषाएं शामिल हैं।
- सांस्कृतिक अनुभव: भाषा के साथ-साथ छात्रों को पारंपरिक व्यंजन बनाना और क्षेत्रीय कलाओं का अनुभव करने का अवसर भी मिलेगा।
सफलता का अगला चरण
2025 में कुछ चुनिंदा केंद्रों पर मिली सफलता के बाद, सरकार ने अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एनसीईआरटी (NCERT) और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) ने मिलकर विशेष पाठ्य सामग्री तैयार की है।
2025 में कुछ चुनिंदा केंद्रों पर मिली सफलता के बाद, सरकार ने अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एनसीईआरटी (NCERT) और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) ने मिलकर विशेष पाठ्य सामग्री तैयार की है।
शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह पहल न केवल बच्चों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देगी, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी पुख्ता करेगी।

