लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मोबाइल फोन की EMI वसूली के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मोबाइल की किस्त नहीं चुका पाने पर कुछ रिकवरी एजेंट एक युवक को घर से अपने साथ ले गए और करीब पांच दिन तक उसे बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसके साथ मारपीट करने, जबरन मजदूरी कराने और एक ब्लड बैंक में उसका खून निकलवाने का भी आरोप लगाया गया है।
मामला निगोहां थाना क्षेत्र के राजाराम खेड़ा पुरहिया गांव का है। पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने अब मामले में अपहरण समेत गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। DCP दक्षिणी के निर्देश के बाद आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। साथ ही, शिकायत के बावजूद शुरुआती स्तर पर कार्रवाई नहीं करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
करीब 21 हजार रुपये का मोबाइल किस्तों पर खरीदा था
रिपोर्टों के मुताबिक, गांव निवासी नेवल ने निगोहां कस्बे की एक मोबाइल दुकान से करीब 21 हजार रुपये का मोबाइल फोन किस्तों पर खरीदा था। आर्थिक परेशानी के कारण वह समय पर किस्त नहीं चुका पाया। परिवार का कहना है कि इसी बकाया EMI को लेकर रिकवरी एजेंट पहले भी उनके घर आए थे।
परिवार के अनुसार, 8 सितंबर को शुभम नाम का एक कथित रिकवरी एजेंट और एक अन्य युवक उनके घर पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने पहले मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिया और इसके बाद नेवल को भी अपने साथ ले गए। इसके बाद युवक घर वापस नहीं लौटा।
लखनऊ: EMI न भरने पर युवक को बंधक बनाकर पीटने और ब्लड बैंक में खून निकालने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है। आरोप है कि रिकवरी एजेंट ने युवक को 5 दिन तक बंधक बनाकर मजदूरी कराई और बेरहमी से पिटाई की। पीड़ित जब चौकी पहुंचा तो पुलिस ने उसे कथित तौर पर भगा दिया और परिवार को भी थाने से… pic.twitter.com/0P07PPu3qc
— Roshan Kumar Journalist (@cameraman_r) September 15, 2026
ब्लड बैंक ले जाने और खून निकलवाने का आरोप
परिवार ने आरोप लगाया कि युवक को अपने साथ ले जाने के बाद उसे एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया।
पीड़ित के परिवार का आरोप है कि वहां युवक से जबरन मजदूरी कराई गई और उसके साथ मारपीट भी की गई। हालांकि, खून निकालने और उसे बेचने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पुलिस जांच का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इन्हें पीड़ित और उसके परिवार की शिकायत के रूप में ही दर्ज किया गया है।
परिवार से पहले EMI के पैसे मांगे, फिर 12 हजार की मांग
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। परिवार के मुताबिक, 13 सितंबर को आरोपियों ने नेवल के भाई राजकुमार को फोन किया और बकाया किस्त के करीब 2,500 से 2,799 रुपये जमा करने को कहा।
परिवार ने रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद कथित तौर पर आरोपियों ने युवक को छोड़ने के लिए 12 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे। परिवार का दावा है कि पैसे देने से इनकार करने पर युवक को जान से मारने और नदी में फेंकने की धमकी भी दी गई।
पांच दिन बाद कैब से घर भेजने का आरोप
परिवार ने पुलिस को बताया कि लगातार संपर्क करने और शिकायत करने के बाद आरोपी ने युवक को पांचवें दिन कैब के जरिए गांव भेज दिया। रिपोर्टों के अनुसार, कैब का किराया भी उसके भाई से ही दिलवाया गया।
घर पहुंचने के बाद नेवल की हालत को लेकर परिवार ने चिंता जताई और उसे लेकर पुलिस के पास पहुंचा।
पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप
मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि युवक के लापता होने के बाद उन्होंने निगोहां पुलिस से शिकायत की, लेकिन शुरुआती स्तर पर उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप यह भी है कि जब युवक वापस आने के बाद थाने पहुंचा तो पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उसे वापस घर भेज दिया। हालांकि, पुलिस की ओर से अब पूरे मामले की जांच की जा रही है और कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
DCP के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए DCP दक्षिणी मुस्ताक के निर्देश पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी शुभम सिंह और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर मारपीट और जानलेवा हमले से जुड़ी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
DCP दक्षिणी के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमों का गठन किया गया है। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों पर पीड़ित परिवार की शिकायत पर लापरवाही बरतने का आरोप है, उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशेगी पुलिस
अब जांच के दौरान पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं—क्या युवक को वास्तव में रिकवरी एजेंट ही अपने साथ ले गए थे? उसे पांच दिनों तक कहां रखा गया? क्या उसे किसी ब्लड बैंक ले जाया गया था? यदि खून निकाला गया तो किस उद्देश्य से और किसकी मौजूदगी में? परिवार से पैसे क्यों मांगे गए और कथित तौर पर अतिरिक्त 12 हजार रुपये की मांग किस आधार पर की गई?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
EMI वसूली के नाम पर कानून हाथ में लेने का आरोप
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्ज या EMI की वसूली के लिए किसी व्यक्ति को कथित तौर पर बंधक बनाना, मारपीट करना, जबरन काम कराना या धमकी देना सामान्य रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इस मामले में पुलिस ने अब FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि युवक के परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और पीड़ित के साथ वास्तव में क्या हुआ।
लखनऊ का यह मामला अब पुलिस जांच के केंद्र में है और कथित रिकवरी एजेंटों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

