सोशल मीडिया कंपनी Meta के लिए 26 अगस्त 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। Facebook और Instagram पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों को लेकर अमेरिका के 48 राज्यों और कई अमेरिकी क्षेत्रों के साथ कंपनी ने ऐतिहासिक समझौता किया है। समझौते के तहत Meta को अगले 10 वर्षों में करीब 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करना पड़ सकता है। इसमें लगभग 12.7 अरब डॉलर का हिस्सा राज्यों के लिए निर्धारित है, जबकि बाकी राशि कुछ शर्तों के पूरा होने पर संबंधित प्रावधानों के तहत जुड़ी है। अमेरिका में इसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े सबसे बड़े टेक समझौतों में से एक माना जा रहा है।
Meta पर आरोप था कि उसके प्लेटफॉर्म में ऐसे फीचर और डिजाइन इस्तेमाल किए गए, जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक ऐप पर बनाए रखते हैं। इनमें लगातार कंटेंट दिखाते रहने वाला फीड, ऑटो-प्ले और दूसरे engagement-based फीचर शामिल हैं। आरोपों में यह भी कहा गया कि कंपनी को बच्चों पर सोशल मीडिया के संभावित मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी होने के बावजूद प्लेटफॉर्म की डिजाइन में पर्याप्त बदलाव नहीं किए गए। हालांकि Meta ने समझौते के तहत किसी कानूनी गलती या wrongdoing को स्वीकार नहीं किया है।
अमेरिका में Instagram और Facebook पर लागू होंगे नए नियम
समझौते के तहत अमेरिका में 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए Facebook और Instagram पर कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। इनमें सबसे प्रमुख दो घंटे की डिफॉल्ट दैनिक समय सीमा है। किशोरों का Facebook और Instagram पर कुल समय मिलाकर दो घंटे प्रतिदिन होगा। इस सीमा को हटाने या बदलने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी।
इसके अलावा रात के समय भी किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक रहेगी। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Night Mode लागू होगा, जिसके दौरान किशोर Feed, Stories, Explore और Reels जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। हालांकि कुछ Direct Messaging सुविधाएं इन प्रतिबंधों से बाहर रहेंगी, ताकि बच्चे अपने परिवार और दोस्तों के संपर्क में रह सकें।
स्कूल के समय यानी सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक notifications को mute करने का प्रावधान भी किया गया है। इसका उद्देश्य स्कूल के दौरान सोशल मीडिया से आने वाले लगातार notifications के कारण होने वाली परेशानी को कम करना है।
इसके अलावा किशोरों को गैर-personalized यानी algorithm से अलग chronological feed चुनने का विकल्प मिलेगा। Autoplay को बंद करने की सुविधा भी होगी। Like और reaction की संख्या को डिफॉल्ट रूप से छिपाने, उम्र के हिसाब से content restrictions और संदिग्ध वयस्कों से संपर्क को सीमित करने जैसे उपाय भी समझौते का हिस्सा हैं।
उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने पर भी बढ़ेगी सख्ती
समझौते का एक अहम हिस्सा Age Assurance है। Meta ने कहा है कि वह ऐसे तकनीकी सिस्टम को मजबूत करेगी, जिनसे यह पता लगाया जा सके कि कोई उपयोगकर्ता वास्तव में किस उम्र का है।
इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि कई बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय अपनी वास्तविक उम्र नहीं बताते। Meta के अनुसार कंपनी 13 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान करने के साथ-साथ 13 से 17 वर्ष के किशोरों की पहचान करने वाली तकनीक को भी मजबूत करेगी।
यही पहल आने वाले समय में भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत में क्या स्थिति है?
भारत में अमेरिका जैसा यह समझौता सीधे लागू नहीं होगा। यानी अमेरिका में तय की गई दो घंटे की सीमा, रात 12 से सुबह 6 बजे तक रोक और स्कूल मोड भारत में फिलहाल अपने आप लागू नहीं हो जाते।
लेकिन भारत में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पहले से कानूनी ढांचा मौजूद है। Digital Personal Data Protection Act, 2023 और उससे जुड़े 2025 के नियमों में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के लिए विशेष सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।
भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना गया है और बच्चे के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की verifiable consent प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए डेटा फिड्यूशियरी को माता-पिता की पहचान और उम्र की पुष्टि के लिए निर्धारित तकनीकी और संगठनात्मक उपाय अपनाने होंगे।
इसका मतलब है कि भारत में भी आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई नाबालिग किस उम्र का है और उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की आवश्यक सहमति मौजूद है।
क्या भारत में भी दो घंटे की लिमिट लग सकती है?
फिलहाल ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत भारत में Facebook या Instagram चलाने वाले बच्चों के लिए दो घंटे की अनिवार्य दैनिक सीमा तय की गई हो।
हालांकि अमेरिका के इस फैसले से भारत सहित दूसरे देशों में यह बहस जरूर तेज हो सकती है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर केवल डेटा सुरक्षा के नियम पर्याप्त हैं या फिर screen time, रात में इस्तेमाल, algorithmic recommendations और parental controls पर भी स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए।
अगर भारत सरकार भविष्य में अमेरिका की तरह समय सीमा लागू करना चाहती है तो उसके लिए भारतीय कानून और नियामकीय प्रक्रिया के तहत अलग से फैसला लेना होगा।
भारत में Age Verification बन सकता है बड़ा मुद्दा
भारत में इस पूरे मामले का सबसे बड़ा असर Age Verification और Parental Consent के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है।
DPDP Rules के तहत बच्चों के डेटा को प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सत्यापन योग्य सहमति की व्यवस्था है। नियमों में पहचान और उम्र की विश्वसनीय जानकारी या अधिकृत संस्था से उपलब्ध कराए गए विवरण अथवा संबंधित virtual token के माध्यम से सत्यापन की व्यवस्था बताई गई है।
इसलिए भविष्य में Instagram, Facebook और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों के अकाउंट को लेकर उम्र की जांच और अभिभावकीय सहमति की प्रक्रिया ज्यादा मजबूत हो सकती है।
दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ेगा दबाव
Meta के अमेरिकी समझौते का असर केवल Facebook और Instagram तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। Meta ने खुद TikTok और YouTube से भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
समझौते की कुछ वित्तीय शर्तें भी प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म के समान सुरक्षा उपाय अपनाने से जुड़ी हैं। अगर दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म भी किशोरों के लिए समय सीमा, Night Mode और Age Assurance जैसे उपाय अपनाते हैं तो सोशल मीडिया इंडस्ट्री में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नया मानक बन सकता है।
भारत में भी Instagram, Facebook, YouTube, Snapchat और दूसरे प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में युवा उपयोगकर्ताओं तक पहुंच रखते हैं। ऐसे में अगर दुनिया के प्रमुख बाजारों में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नियम सख्त होते हैं तो भारत में भी कंपनियों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है।
क्या भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बड़ा बदलाव आएगा?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत में अमेरिकी मॉडल हूबहू लागू किया जाएगा। भारत का नियामकीय ढांचा अलग है और यहां बच्चों की डेटा सुरक्षा के लिए पहले से प्रावधान मौजूद हैं।
लेकिन Meta के इस समझौते ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल उनकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने तक सीमित होनी चाहिए या फिर उनके स्क्रीन टाइम, मानसिक स्वास्थ्य, algorithmic feed और सोशल मीडिया की लत से जुड़े जोखिमों को भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए?
अमेरिका के इस समझौते के बाद यह बहस दुनिया के कई देशों में तेज होने की संभावना है। भारत में भी आने वाले समय में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर उम्र सत्यापन, माता-पिता की सहमति, सुरक्षित कंटेंट, algorithmic recommendations और parental controls पर ज्यादा सख्त नियम देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल भारत में Meta पर अमेरिका वाला 18 अरब डॉलर का भुगतान या दो घंटे की दैनिक सीमा लागू नहीं हुई है। लेकिन अमेरिकी फैसला यह संकेत जरूर देता है कि **बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब केवल टेक कंपनियों की जिम्मेदारी का विषय नहीं, बल्कि सरकारों और नियामकों के लिए भी बड़ा नीति-सवाल बन चुका है।**

