गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। धानोरा तहसील के जप्तलाई गांव स्थित एक आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में जहरीले सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
छात्रावास में फर्श पर सो रही थीं छात्राएं
रिपोर्टों के मुताबिक, घटना उस समय हुई जब छात्राएं छात्रावास में सो रही थीं। बताया गया है कि छात्राएं फर्श पर सो रही थीं, तभी एक जहरीले सांप ने वहां मौजूद छह बच्चियों को डस लिया।
सांप के काटने के बाद छात्राओं की हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में सभी प्रभावित छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान तीन बच्चियों की मौत हो गई। तीन अन्य छात्राओं का उपचार अस्पताल में जारी है।
मृत छात्राओं की उम्र 8, 12 और 14 साल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाली तीन छात्राओं की उम्र 8, 12 और 14 वर्ष बताई गई है। इतनी कम उम्र की बच्चियों की मौत से उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण भी गमगीन हैं।
तीन छात्राएं अस्पताल में भर्ती
सांप के काटने से प्रभावित तीन अन्य छात्राओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है।
प्रशासन की ओर से घायल छात्राओं की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घटना के बाद छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राओं और उनके परिवारों में भी चिंता का माहौल है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि छात्रावास में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और जहरीला सांप छात्राओं के सोने वाले स्थान तक कैसे पहुंचा।
साथ ही, छात्रावास की साफ-सफाई, भवन की स्थिति, फर्श पर सोने की व्यवस्था और सांपों से बचाव के लिए किए गए उपायों की भी जांच किए जाने की संभावना है।
आदिवासी इलाकों में सांप के काटने का खतरा
गढ़चिरौली महाराष्ट्र का वन क्षेत्र से घिरा आदिवासी बहुल जिला है। ऐसे इलाकों में बारिश के मौसम के दौरान सांपों के आबादी वाले क्षेत्रों और घरों में आने का खतरा बढ़ जाता है। महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में सर्पदंश को एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती माना जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर दूरदराज के आवासीय स्कूलों और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर बारिश के मौसम में छात्रावासों में नियमित साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई, दरवाजे-खिड़कियों की सुरक्षा और सांपों से बचाव के इंतजाम बेहद जरूरी हैं।
परिवारों में पसरा मातम
तीन मासूम छात्राओं की मौत की खबर से उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है। जिस उम्र में बच्चियां पढ़ाई और अपने भविष्य के सपने संजो रही थीं, उसी उम्र में इस दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों को गहरा सदमा दिया है।
फिलहाल प्रशासन की जांच और अस्पताल में भर्ती तीन छात्राओं के स्वास्थ्य पर सभी की नजर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।
घटना ने आदिवासी आवासीय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

