उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आया एक मामला इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने में प्रशासन को सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि प्रतिमा को हटाने के लिए 40 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार प्रयास किए गए, भारी मशीनरी और क्रेन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।
प्रतिमा को हटाने की कोशिश के दौरान जब तमाम तकनीकी प्रयास कामयाब नहीं हुए तो मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं के बीच यह घटना आस्था और भावनाओं से जुड़ा विषय बन गई। कई भक्त इसे भगवान हनुमान की इच्छा और आस्था का चमत्कार मान रहे हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर इसे तकनीकी और संरचनात्मक कारणों से समझने की कोशिश की जा रही है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर शिफ्ट करने की तैयारी
दरअसल, उज्जैन में आने वाले सिंहस्थ-2028 को देखते हुए शहर में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई इलाकों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से छत्री चौक और बड़ा सराफा क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने की योजना के तहत पुराने मंदिर को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रशासन की योजना मंदिर के ढांचे को हटाकर सड़क चौड़ीकरण का रास्ता तैयार करने की थी। मंदिर का अन्य हिस्सा हटाए जाने के बाद जब मुख्य चुनौती हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की आई तो मामला अचानक मुश्किल हो गया।
उज्जैन में करीब 170 साल पुरानी खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए 40 घंटे से अधिक समय तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।
सड़क चौड़ीकरण के लिए किए जा रहे इस प्रयास के बीच यह घटना श्रद्धालुओं के बीच आस्था का एक बेहद भावुक और अद्भुत… pic.twitter.com/lh2shVU8B0
— Deepak (@Deepak_indskn) September 9, 2026
क्रेन और भारी मशीनों से भी नहीं हिली प्रतिमा
प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए तकनीकी टीम ने अलग-अलग तरीकों से प्रयास किए। भारी मशीनरी और क्रेन की मदद से प्रतिमा को उठाने की कोशिश की गई। लेकिन कई घंटे की कोशिश के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, मौके पर लोगों की भीड़ बढ़ती गई। श्रद्धालु प्रतिमा को हटाने की कोशिश को देखते रहे। करीब 40 घंटे से अधिक समय तक चले प्रयासों के बावजूद जब प्रतिमा नहीं हिली तो यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बन गई।
सोशल मीडिया पर भी प्रतिमा को हटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला तेजी से वायरल हो गया।
श्रद्धालुओं ने कहा- बजरंगबली की इच्छा के बिना कुछ नहीं होगा
प्रतिमा के नहीं हिलने की घटना को लेकर श्रद्धालुओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई भक्तों का कहना है कि भगवान हनुमान की प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने की कोशिश के बावजूद उसका नहीं हिलना उनके लिए बेहद भावुक और अद्भुत अनुभव है।
कुछ श्रद्धालु इसे बजरंगबली की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि भगवान की इच्छा नहीं है तो कोई भी ताकत प्रतिमा को वहां से नहीं हटा सकती।
हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं के बीच प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ मामले को वैज्ञानिक एवं संरचनात्मक नजरिए से देख रहे हैं।
अब IIT इंदौर के विशेषज्ञों की मदद
प्रतिमा को हटाने में लगातार असफलता के बाद प्रशासन ने मामले की तकनीकी जांच कराने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक IIT इंदौर के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि प्रतिमा जमीन के अंदर किस तरह स्थापित है और उसके नीचे या आसपास की संरचना कैसी है। यह भी जांच की जाएगी कि प्रतिमा का आधार कितना गहरा है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करने का कोई सुरक्षित तरीका संभव है या नहीं।
यानी अब मामला सिर्फ प्रतिमा को उठाकर दूसरी जगह रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी संरचना और आधार की तकनीकी स्थिति को समझना भी जरूरी हो गया है।
प्रतिमा की उम्र को लेकर भी चर्चा
खड़े हनुमान मंदिर और प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इसे करीब 170 साल पुराना बताया जा रहा है। हालांकि प्रतिमा की वास्तविक उम्र और उसके इतिहास को लेकर विशेषज्ञ स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
ऐसे में प्रतिमा को स्थानांतरित करने से पहले उसकी ऐतिहासिकता, संरचना और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखना प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
विकास कार्य और आस्था के बीच बना संवेदनशील मामला
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और सड़कों को चौड़ा करने की जरूरत बताई जा रही है। दूसरी तरफ खड़े हनुमान मंदिर जैसे पुराने धार्मिक स्थलों से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
यही वजह है कि प्रतिमा को हटाने का मामला अब सिर्फ एक निर्माण या सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई नहीं रह गया है। यह विकास और आस्था के बीच संतुलन का संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सड़क चौड़ीकरण का काम भी प्रभावित न हो और श्रद्धालुओं की भावनाओं का भी सम्मान किया जाए।
फिलहाल नहीं हिली प्रतिमा, आगे क्या होगा?
लगातार प्रयासों के बावजूद प्रतिमा को हटाने में सफलता नहीं मिलने के बाद अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।
फिलहाल उज्जैन का यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। एक तरफ श्रद्धालु इसे “बजरंगबली की इच्छा” से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से इस गुत्थी को समझने में जुटा है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि विशेषज्ञों की जांच के बाद 170 साल पुरानी बताई जा रही खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन क्या फैसला करता है।

