Mother’s Day 2026: मदर्स डे 2026 (Mother’s Day 2026) के मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए बड़ी घोषणा की है. दिल्ली सरकार ने ‘आफ्टरकेयर स्कीम फॉर यंग पर्सन्स’ (Aftercare Scheme for Young Persons) लॉन्च की है, जिसके तहत 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद भी बच्चों को पढ़ाई, स्किल ट्रेनिंग और नौकरी तलाशने में सहायता दी जाएगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चों को आश्रय और सुरक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने तक है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा और युवा सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर भविष्य बना सके और कभी खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे. दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में 3.5 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है.
इस योजना के तहत पात्र युवाओं को उच्च शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई के लिए सहायता दी जाएगी. साथ ही स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंच भी उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार युवाओं को इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी ध्यान देगी. इसके अलावा योजना में वित्तीय सहायता और मासिक स्टाइपेंड का भी प्रावधान किया गया है.
मदर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लाजपत नगर स्थित विलेज कॉटेज होम का दौरा किया और वहां रह रहे बच्चों से मुलाकात की. यह संस्था महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित की जाती है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ समय बिताया और नई आफ्टरकेयर योजना की जानकारी साझा की.
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में फिलहाल 88 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन्स हैं, जिन्हें सरकार और विभिन्न एनजीओ मिलकर संचालित करते हैं. ये संस्थान 18 साल तक के बच्चों को देखभाल, सुरक्षा, शिक्षा, पुनर्वास और जरूरी सहायता प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली में लड़कों और लड़कियों के लिए दो आफ्टरकेयर होम पहले से मौजूद हैं, जहां 18 साल से अधिक उम्र के युवाओं को रहने, भोजन, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं दी जाती हैं ताकि वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें.
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य सिर्फ संस्थागत देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करना भी है. बच्चों को शिक्षा, लाइफ स्किल ट्रेनिंग, व्यावसायिक कोर्स, करियर एक्सपोजर, काउंसलिंग, भावनात्मक और व्यवहारिक सहयोग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, करियर गाइडेंस और पुनर्वास योजना जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं ताकि वे वयस्क होने के बाद सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि हर साल लगभग 150 से 200 युवा 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद चाइल्ड केयर संस्थानों से बाहर निकलते हैं. संस्थानों के भीतर उन्हें सहायता मिलती है, लेकिन बाहर निकलने के बाद उन्हें शिक्षा जारी रखने, कौशल हासिल करने, रोजगार पाने, आर्थिक कठिनाइयों से निपटने और स्वतंत्र जीवन शुरू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

