नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चीनी मूल की महिला का पोस्ट चर्चा में है, जिसमें वह अपने चार महीने के बच्चे को शांत कराने के लिए हनुमान चालीसा सुनाने की बात बता रही हैं। अमेरिका में रहने वाली बिजनेसवुमन और एटिकेट एक्सपर्ट सारा जेन हो (Sarah Jane Ho) ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मातृत्व और बच्चे की रोजमर्रा की दिनचर्या से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। इनमें हनुमान चालीसा सुनाकर बच्चे को शांत कराने का उनका अनुभव सबसे ज्यादा चर्चा में है।
बच्चा रोए तो चलाती हैं हनुमान चालीसा
सारा के मुताबिक, जब उनका चार महीने का बेटा परेशान या बहुत रोने लगता है, तो वह उसे हनुमान चालीसा सुनाती हैं। उनका दावा है कि इसे चलाने के बाद बच्चा करीब 5 सेकंड में शांत होने लगता है और लगभग 2 मिनट में सो जाता है।
सारा ने बताया कि उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में भारतीय दोस्तों के जरिए पता चला था। उन्होंने कहा कि Burning Man कार्यक्रम के दौरान उनके कुछ भारतीय दोस्तों ने उन्हें यह भक्ति रचना सुनाई थी। इसके बाद से यह उनके बच्चे की सुबह की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है और वह इसे कई बार लगातार चलाती हैं।
हालांकि, बच्चे के दो मिनट में सो जाने की बात सारा का व्यक्तिगत अनुभव और दावा है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं बताया गया है कि हनुमान चालीसा सुनने से हर बच्चे पर इसी तरह का प्रभाव पड़ेगा।
बच्चे के रोने पर तुरंत गोद में उठाती हैं
सारा ने अपनी पोस्ट में अपनी पेरेंटिंग शैली के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब उनका बच्चा रोता है तो वह उसे तुरंत गोद में उठा लेती हैं। वह बच्चे को अकेला छोड़कर तब तक रोने देने वाली ‘cry it out’ पद्धति को अपनाने में विश्वास नहीं करतीं।
उन्होंने कहा कि अगर बच्चे को शांत करने की शुरुआती कोशिशें काम नहीं करतीं, तो वह हनुमान चालीसा चलाती हैं। उनके अनुसार, इससे बच्चे को शांत करने में मदद मिलती है।
ब्रह्म्स की लोरी भी बच्चे की दिनचर्या में
सारा ने बताया कि वह अपने बच्चे को रोजाना करीब आठ मिनट Brahms’ lullaby भी सुनाती हैं। उनका मानना है कि इससे बच्चे के मस्तिष्क के विकास में मदद मिल सकती है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में अपनी पोस्ट में विस्तृत वैज्ञानिक प्रमाण साझा नहीं किए।
खाने और एलर्जी को लेकर भी बताया अपना तरीका
सारा ने अपने बच्चे की डाइट और एलर्जी को लेकर अपनाए जा रहे कुछ तरीकों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बच्चे के लिए उनकी सरोगेट मां ब्रेस्ट मिल्क पंप कर रही हैं। सारा ने कहा कि वह सरोगेट को मूंगफली और सोया मिल्क भी भेजती हैं, ताकि बच्चे को इन खाद्य पदार्थों का शुरुआती एक्सपोजर मिल सके।
हालांकि, इस तरीके को लेकर खुद सारा ने भी स्वीकार किया कि उन्हें नहीं पता कि इससे भविष्य में एलर्जी रोकने के दावे के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं या नहीं।
कुत्तों के संपर्क में भी ला रही हैं बच्चा
सारा ने बताया कि वह अपने चार महीने के बेटे को दोस्तों और पड़ोसियों के कुत्तों के आसपास भी ले जाती हैं। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि बच्चा कम उम्र से ही पालतू जानवरों के संपर्क में रहे।
इसके अलावा वह बच्चे को बगीचे में नंगे पैर प्राकृतिक सतहों, जैसे घास, मिट्टी और पत्थर पर रखने की बात भी बताती हैं। सारा इसे ‘grounding’ कहती हैं और मानती हैं कि इससे बच्चे के शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल विकास में मदद मिल सकती है। इन दावों को भी उनके व्यक्तिगत विचार/पेरेंटिंग अनुभव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
सारा की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खास तौर पर हनुमान चालीसा वाले हिस्से पर गया। कई लोगों ने बच्चे को शांत करने के उनके तरीके की सराहना की, जबकि कुछ यूजर्स ने हनुमान चालीसा के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
इस पोस्ट ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि एक चीनी मूल की महिला अपने छोटे बच्चे के लिए भारतीय धार्मिक परंपरा से जुड़ी हनुमान चालीसा का इस्तेमाल करती दिखाई दे रही हैं।
वीडियो और पोस्ट क्यों हो रही है वायरल?
सारा ने अपनी पोस्ट में मां बनने के बाद के अनुभवों और अपने बच्चे की दिनचर्या के बारे में कई बातें एक साथ साझा कीं। लेकिन बच्चे के रोने पर हनुमान चालीसा बजाने और उसके कुछ ही समय बाद शांत होने का दावा लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।
फिलहाल यह पूरा मामला सारा के सोशल मीडिया पर साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। बच्चे के हनुमान चालीसा सुनकर शांत होने को लेकर किसी निश्चित चिकित्सकीय या वैज्ञानिक निष्कर्ष का दावा नहीं किया गया है।

