अल नीनो अलर्ट (Photo Credits: File Image)
जेनेवा, 3 जून: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) (WMO) ने वैश्विक मौसम प्रणालियों को लेकर एक बेहद चिंताजनक चेतावनी जारी की है. संगठन के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी जून से अगस्त 2026 के बीच ‘अल नीनो’ (El Nino) जलवायु पैटर्न के विकसित होने की 80 प्रतिशत संभावना है. मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली असामान्य वृद्धि से पहचाना जाने वाला यह घटनाक्रम दुनिया भर के मौसम चक्र को बाधित करने और चरम जलवायु घटनाओं को और अधिक तीव्र करने के लिए जाना जाता है.
भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी की यह चेतावनी बेहद गंभीर संकेत लेकर आई है. ऐतिहासिक रूप से अल नीनो का सीधा संबंध भारत में कमजोर मानसूनी बारिश और लंबे समय तक चलने वाली भीषण गर्मी (Heatwaves) से रहा है. इस स्थिति से देश के कृषि क्षेत्र, जलाशयों में पानी की उपलब्धता और समग्र आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है. यह भी पढ़ें: El Nino Forecast: अल नीनो के सक्रिय होने की चेतावनी, भारत पर मंडराया भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का खतरा; समझें इसके पीछे का विज्ञान
भारतीय मानसून और कृषि पर संकट के बादल
अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है, जो भारत की कृषि-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य लाइफलाइन है. वर्तमान पूर्वानुमानों के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर मध्य भारत में इस साल सामान्य से कम (Below-Normal) बारिश होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कई कृषि प्रधान राज्यों में सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया है.
डब्ल्यूएमओ (WMO) ने अपनी रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया है कि 90 प्रतिशत से अधिक निश्चितता के साथ यह अल नीनो स्थिति कम से कम नवंबर 2026 तक बनी रहेगी. इसका सीधा अर्थ यह है कि मानसून के पूरे सीजन और उसके बाद भी देश को इस पर्यावरणीय और मौसमी तनाव का सामना करना पड़ सकता है.
बढ़ते वैश्विक तापमान की आग में घी का काम
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्र के भीतर का तापमान कुछ क्षेत्रों में औसत से 6 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक दर्ज किया जा रहा है. यह अत्यधिक ऊष्मा संचय अल नीनो के तेजी से मजबूत होने का मुख्य कारण है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि यह घटना पहले से ही गर्म हो रही धरती पर “आग में घी डालने” (Pour fuel on the fire) का काम करेगी, जिससे दुनिया भर में हीटवेव, सूखा और अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश की घटनाएं और उग्र हो जाएंगी.
इस मौसमी बदलाव के कारण जहाँ दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और मध्य एशिया में अत्यधिक बारिश देखी जा सकती है, वहीं भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों को अत्यधिक शुष्क (Drier) और गर्म परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा. इससे पहले साल 2023-24 में आया पिछला प्रमुख अल नीनो इतिहास के सबसे मजबूत घटनाक्रमों में दर्ज किया गया था, जिसके कारण साल 2024 में वैश्विक तापमान ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे.
तैयारी और जल प्रबंधन को मजबूत करने की अपील
डब्ल्यूएमओ की महानिदेशक सेलेस्टे साउलो ने सभी प्रभावित देशों से इस स्थिति का सामना करने के लिए पहले से ही मुस्तैद रहने की अपील की है. उन्होंने सचेत किया कि एक मजबूत अल नीनो दुनिया के कई हिस्सों में पानी के संकट को बढ़ा सकता है और महासागरों से लेकर मैदानी इलाकों तक हीटवेव की आवृत्ति को तेज कर सकता है.
जलवायु एजेंसी ने भारत सहित सभी देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि वे अपनी शुरुआती चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को मजबूत करें, कृषि के लिए जल प्रबंधन रणनीतियों में सुधार करें और चरम मौसमी पैटर्न के आर्थिक व सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाएं.

