नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) सहित विभिन्न संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे युवाओं और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग राज्यों में हिरासत में लिया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि प्रदर्शन से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में युवाओं को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि कथित कार्रवाई के बावजूद युवा पीछे हटने वाले नहीं हैं और वे 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर तक मार्च करेंगे।
दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए अपने पोस्ट में कहा कि युवाओं को डराकर आंदोलन रोकने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि वह दिल्ली पहुंचकर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होंगे और जंतर-मंतर तक मार्च करने के अपने फैसले पर कायम हैं।
पुणे से दिल्ली जा रहे छात्रों को रास्ते में रोकने का दावा
कॉकरोच जनता पार्टी ने 8 अक्टूबर को आरोप लगाया था कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेने जा रहे लोगों को विभिन्न राज्यों में रोका जा रहा है। पार्टी के मुताबिक, पुणे से छात्रों का एक समूह बस के जरिए दिल्ली आ रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्हें कथित तौर पर हिरासत में ले लिया गया।
संगठन ने दावा किया कि छात्रों को बस में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा था। इस संबंध में पार्टी ने मध्य प्रदेश में चलती बस के अंदर रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी साझा किया। वीडियो में एक युवक कथित तौर पर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात कहता सुनाई देता है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे युवाओं की पहचान, हिरासत की परिस्थितियों और उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
भोपाल में तेलंगाना के चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि तेलंगाना से जुड़े उसके चार स्वयंसेवकों को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले भोपाल में हिरासत में लिया गया। संगठन के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दावा किया कि राजस्थान में पार्टी के सह-प्रभारी दीपक बलियान को भी हिरासत में लिया गया है।
रांका के अनुसार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी संगठन के कई स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य लोगों को दिल्ली पहुंचने और प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना है।
फिलहाल, विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए लोगों की वास्तविक संख्या और इन घटनाओं की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित आरोपों को संगठन के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने का आरोप
आशुतोष रांका ने पश्चिम बंगाल की घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कोलकाता में अब्दुल और उनकी टीम को सादे कपड़ों में पहुंचे कुछ लोग अपने साथ ले गए। संगठन ने आशंका जताई कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
रांका ने पुलिस की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवाओं को रोकने के बजाय पुलिस को अन्य अपराधों पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, कोलकाता में बताए गए घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित लोगों को अपने साथ ले जाने वाले व्यक्तियों की पहचान के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
एसएफआई ने भी पुलिस पर दबाव बनाने का लगाया आरोप
इस विवाद के बीच स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि पुलिसकर्मी उसके कार्यकर्ताओं और अन्य लोकतांत्रिक संगठनों से जुड़े लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं। एसएफआई के मुताबिक, कार्यकर्ताओं के परिवारों पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वे 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना न हों।
संगठन ने अपने बयान में दावा किया कि पिछली रात से ही पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं के घरों पर पहुंच रहे हैं। एसएफआई का आरोप है कि कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और उनके परिजनों को परेशान किया गया।
एसएफआई उन पांच वामपंथी संगठनों में शामिल बताया गया है, जिन्होंने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर दिल्ली में संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है।
सहारनपुर में एसएफआई संयोजक और किसान सभा नेता को हिरासत में लेने का दावा
एसएफआई ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों में संगठन के सहारनपुर जिला संयोजक आरिफ और अखिल भारतीय किसान सभा के नेता दाऊद राव भी शामिल हैं।
संगठन ने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं पर दबाव डालकर उनके पते और निजी जानकारियां जुटाने की कोशिश की जा रही है। एसएफआई का कहना है कि इस तरह की कथित कार्रवाई से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार पर सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि, इन मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और हिरासत से जुड़े सभी विवरण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले विभिन्न संगठनों की ओर से लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। एक ओर संगठन कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोके जाने और कार्यकर्ताओं के घरों पर पुलिस के पहुंचने के आरोप सामने आए हैं।
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि कथित हिरासत की घटनाओं के बावजूद वह दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर तक मार्च करने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे।
फिलहाल, इस पूरे मामले में विभिन्न संगठनों की ओर से किए गए दावों, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और अलग-अलग राज्यों में हुई कथित कार्रवाइयों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए संबंधित प्रशासन और पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

