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मुंगेली/लोरमी: छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्र में वनोपज और मशरूम लेने पहुंचे युवकों के सामने अचानक बाघिन और उसके शावक आ गए। बाघिन ने युवकों को देखकर हमला कर दिया। इस हमले में बांधा गांव निवासी 25 वर्षीय धरमजीत धृतलहरे की मौत हो गई, जबकि उसके साथ मौजूद अन्य युवक किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। घटना के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है। अधिकारियों ने लोगों से टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने की अपील की है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगलों में बाघों की गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। वन विभाग के मुताबिक घटना वाले इलाके में एक बाघिन अपने शावकों के साथ घूम रही थी। ऐसे समय में बाघिन के बेहद करीब पहुंचना इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि शावकों की मौजूदगी में मादा बाघिन अपने क्षेत्र और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद आक्रामक हो जाती है।
जंगल में वनोपज लेने पहुंचे थे युवक
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बांधा गांव निवासी धरमजीत धृतलहरे अपने कुछ साथियों के साथ जंगल की ओर गया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक युवक जंगल में पिहरी यानी मशरूम, करील और अन्य वनोपज लेने के लिए गए थे। अलग-अलग रिपोर्टों में साथ गए युवकों की संख्या चार से पांच बताई गई है, इसलिए इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बताया जा रहा है कि युवक अचानकमार टाइगर रिजर्व के लोरमी बफर क्षेत्र के जंगल में पाड़ाडोंगरी के आसपास पहुंचे थे। यह इलाका घने जंगल और बांस के वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है। इसी इलाके में इन दिनों बाघों की आवाजाही भी बनी हुई है।
युवकों को शायद अंदाजा नहीं था कि वे जिस इलाके में पहुंचे हैं, वहां बाघिन अपने शावकों के साथ मौजूद है। जंगल में अचानक उनका सामना बाघिन से हो गया। इसके बाद कुछ ही क्षणों में हालात बेहद खतरनाक हो गए।
शावकों के साथ मौजूद थी बाघिन
वन विभाग की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक घटना वाले इलाके में बाघिन के साथ दो से तीन शावकों की मौजूदगी देखी गई थी। जैसे ही बाघिन को इंसानों की मौजूदगी का एहसास हुआ, उसने युवकों की ओर हमला कर दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा बाघिन आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर सकती है, लेकिन जब उसके शावक आसपास हों तो स्थिति अलग हो जाती है। उसे यदि लगे कि उसके बच्चों को खतरा है तो वह अचानक आक्रामक होकर हमला कर सकती है।
इसी वजह से जंगल में शावकों के बेहद करीब जाना बेहद खतरनाक माना जाता है। घटना में भी यही स्थिति सामने आने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वन विभाग अभी यह जांच कर रहा है कि वास्तव में हमला किस वन्यजीव ने किया और घटनाक्रम किस तरह हुआ।
अचानक हुआ हमला, भागने लगे युवक
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जंगल में बाघिन को देखकर युवकों में अफरा-तफरी मच गई। बाघिन ने उनकी तरफ दौड़ लगाई तो बाकी युवक अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।
इसी दौरान धरमजीत पीछे रह गया। बताया जा रहा है कि भागते समय वह गिर गया या बाघिन की चपेट में आ गया। इसके बाद बाघिन ने उस पर हमला कर दिया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, युवक के शरीर पर विशेष रूप से गर्दन के हिस्से में गंभीर चोट के निशान मिले। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई गई कि किसी हिंसक वन्यजीव ने उस पर हमला किया। क्षेत्र में बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी के कारण बाघिन या उसके शावकों के हमले की संभावना की जांच की जा रही है।
दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन नहीं बचा सके
घटना इतनी अचानक हुई कि साथ मौजूद युवकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बाघिन के हमले के बाद बाकी युवक पीछे हट गए और सुरक्षित स्थान की ओर भागे।
धरमजीत गंभीर रूप से घायल हो चुका था। वन विभाग को सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची। उसे जंगल से बाहर लाने की कोशिश की गई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी हालत बेहद खराब थी।
अधिकारियों के मुताबिक घायल युवक की गांव ले जाते समय मौत हो गई। इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
वन विभाग ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों से जुड़े संकेत जुटाए। घटना के बाद इलाके में निगरानी बढ़ाने की बात भी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल—प्रतिबंधित क्षेत्र में कैसे पहुंचे?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब अचानकमार टाइगर रिजर्व का जंगल प्रतिबंधित था, तो युवक वहां तक कैसे पहुंचे?
वन विभाग के मुताबिक टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्रों में 15 जून से 31 अक्टूबर तक प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। इस अवधि में लोगों को जंगल में वनोपज संग्रहण के लिए भी नहीं जाने की सलाह दी जाती है। वन विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को पहले से ही जंगल में प्रवेश नहीं करने की चेतावनी दी गई थी।
इसके बावजूद युवक जंगल के भीतर पहुंच गए। अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि उन्होंने किस रास्ते से प्रवेश किया और प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंचे।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या युवकों को क्षेत्र में बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी के बारे में जानकारी थी। अगर चेतावनी के बावजूद वे अंदर गए थे तो यह भी जांच का विषय होगा कि उन्हें किस स्तर पर रोका गया या रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
जंगल में बाघों की लगातार मौजूदगी
अचानकमार टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ समय से बाघों की मौजूदगी लगातार सामने आती रही है। वन विभाग के अनुसार घटना वाले क्षेत्र में बाघों की आवाजाही बनी हुई थी और बाघिन को शावकों के साथ देखा गया था।
शावकों के साथ घूम रही बाघिन का व्यवहार सामान्य परिस्थितियों से अलग हो सकता है। वह अपने बच्चों को किसी भी संभावित खतरे से बचाने के लिए इंसानों या दूसरे जानवरों पर हमला कर सकती है।
यही वजह है कि जंगल में अचानक बाघ या बाघिन दिखाई देने पर उसके करीब जाने, उसका पीछा करने या उसके शावकों को देखने की कोशिश करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने ला दिया है। एक तरफ जंगल में बाघों का संरक्षण जरूरी है, तो दूसरी तरफ जंगल से लगे गांवों के लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
धरमजीत की मौत की खबर सामने आने के बाद बांधा और आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को डर है कि जंगल में बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी के कारण भविष्य में भी ऐसी घटना हो सकती है।
खासकर वे ग्रामीण जो अपनी आजीविका या घरेलू जरूरतों के लिए जंगल पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कई ग्रामीण जंगल से मशरूम, करील, लकड़ी और अन्य वनोपज एकत्र करते हैं। लेकिन इस समय जंगल में वन्यजीवों की सक्रियता को देखते हुए ऐसी गतिविधियां जानलेवा हो सकती हैं।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित वन क्षेत्र में न जाएं और चेतावनी को गंभीरता से लें।
वन विभाग ने शुरू की जांच
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। विभाग इस बात का पता लगाने में जुटा है कि धरमजीत पर हमला किस वन्यजीव ने किया।
अधिकारियों ने बताया है कि क्षेत्र में बाघों की गतिविधियां दर्ज हुई हैं और बाघिन को शावकों के साथ भी देखा गया है। इसी कारण बाघिन या उसके शावकों के हमले की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि वन विभाग ने अभी इसे अंतिम रूप से बाघिन का हमला घोषित नहीं किया है। घटना की परिस्थितियों, घायल युवक के शरीर पर मिले निशानों और इलाके में मौजूद वन्यजीवों के संकेतों की जांच की जा रही है।
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि घटना वास्तव में किस जानवर के हमले में हुई। इससे आगे की सुरक्षा रणनीति तय करने में भी मदद मिलेगी।
बाघिन के शावकों के पास जाना पड़ा भारी
इस घटना से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि जंगल में वन्यजीवों की मौजूदगी को हल्के में लेना कितना खतरनाक हो सकता है। खासकर जब बाघिन अपने शावकों के साथ हो, तब किसी भी इंसानी गतिविधि को वह खतरे के तौर पर देख सकती है।
धरमजीत और उसके साथियों का जंगल में जाना उनके लिए सामान्य गतिविधि रही होगी, लेकिन जिस इलाके में वे पहुंचे वहां परिस्थितियां बेहद अलग थीं। घने जंगल में मौजूद बाघिन और उसके शावकों के बारे में उन्हें समय रहते पता नहीं चल पाया और अचानक आमना-सामना हो गया।
तीन-चार अन्य युवकों के भागकर बच निकलने और धरमजीत के पीछे रह जाने से यह घटना और भी भयावह बन गई।
प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश रोकना बड़ी चुनौती
इस घटना के बाद वन विभाग के सामने एक और बड़ी चुनौती है—प्रतिबंधित क्षेत्रों में ग्रामीणों की आवाजाही रोकना।
सिर्फ बोर्ड लगाना या चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं हो सकता। जंगल से लगे गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाना, संवेदनशील रास्तों की निगरानी करना और ग्रामीणों को वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी देना भी जरूरी हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए दोनों पक्षों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। बाघों के प्राकृतिक आवास में इंसानी दखल कम करना और ग्रामीणों को जंगल की गतिविधियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अब आगे क्या होगा?
धरमजीत की मौत के बाद वन विभाग घटना की विस्तृत जांच कर रहा है। सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाएगा कि हमला किस जानवर ने किया। इसके बाद यह देखा जाएगा कि युवक और उसके साथी प्रतिबंधित क्षेत्र में किस रास्ते से पहुंचे।
वन विभाग की ओर से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है। बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है, ताकि आसपास के गांवों के लोगों को संभावित खतरे से बचाया जा सके।
ग्रामीणों को भी लगातार जंगल में नहीं जाने और वन विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व की यह घटना सिर्फ एक युवक की मौत की खबर नहीं है, बल्कि यह इंसान और जंगल के बीच बढ़ती चुनौती की भी गंभीर याद दिलाती है। एक तरफ बाघ और उनके शावकों के संरक्षण के लिए जंगल को सुरक्षित रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल धरमजीत की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। वन विभाग की जांच के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। लेकिन इस हादसे ने एक बात साफ कर दी है कि प्रतिबंधित वन क्षेत्र में प्रवेश और शावकों के साथ मौजूद बाघिन के करीब जाना कितना बड़ा जोखिम हो सकता है।

