रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के शिकार का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य के संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि प्रदेश के टाइगर रिजर्व और अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों में शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे न केवल वन्यजीवों की संख्या प्रभावित हो रही है, बल्कि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि शिकार रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए वन विभाग ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग लगातार गश्त बढ़ा रहा है, संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और शिकार की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने यह भी कहा कि वन विभाग आधुनिक तकनीक और संयुक्त अभियान के माध्यम से वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और उसने मामले की विस्तृत जांच कराने तथा वन्यजीव संरक्षण की प्रभावी कार्ययोजना सदन के सामने रखने की मांग की। बहस के दौरान कई विधायकों ने बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां बाघों और अन्य वन्यजीवों की बड़ी संख्या पाई जाती है। ऐसे में विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा आने वाले दिनों में भी सदन और प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है।

