रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार और बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत नहीं बढ़ती। कंपनी ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के आंकड़ों के आधार पर कहा है कि जुलाई 2026 में बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। लेकिन इस दावे पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है, वह किसी स्वतंत्र एजेंसी, तकनीकी संस्थान या नियामक संस्था ने नहीं, बल्कि खुद बिजली वितरण कंपनी ने कराया है। ऐसे में विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस रिपोर्ट को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
राज्य के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं ने अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें की हैं। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं और लोगों ने स्मार्ट मीटर हटाने की मांग तक उठाई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पहले की तुलना में बिल में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जबकि बिजली के उपयोग में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
स्मार्ट मीटर या जनता की जेब पर डाका?
अब अगली लड़ाई स्मार्ट मीटर के खिलाफ ही लड़ी जाएगी.
छत्तीसगढ़ में कवर्धा के लोग— अपने घरों, दुकानों और खेतों से ये लुटेरे स्मार्ट मीटर उखाड़कर सीधे विद्युत सब-स्टेशन पहुँच गए!
आख़िर जनता कब तक सहेगी?#SmartMeter #ElectricityBill… pic.twitter.com/BjmHfQO054
— Bharat Jodo Abhiyaan (@withbharatjodo) July 27, 2026
कंपनी का कहना है कि अधिक बिल का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य बिजली उपकरणों का अधिक उपयोग है। साथ ही यह भी कहा गया है कि स्वीकृत भार से अधिक लोड उपयोग करने पर अतिरिक्त चार्ज जुड़ने से भी बिल बढ़ा। कंपनी ने यह भी बताया है कि इस व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत बढ़ाते नहीं हैं, बल्कि जितनी वास्तविक खपत होती है, उसे अधिक सटीक तरीके से रिकॉर्ड करते हैं। लेकिन यदि पुराने मीटर धीमे चल रहे हों, बिलिंग प्रणाली बदली हो या नए शुल्क लागू हुए हों, तो उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक बिल दिखाई दे सकता है। इसलिए केवल कंपनी के सर्वे के आधार पर सभी शिकायतों को गलत नहीं कहा जा सकता।
विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों की मांग है कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और बिलिंग प्रणाली की जांच किसी स्वतंत्र तकनीकी संस्था जैसे IIT, NIT या किसी मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार के दावे सही हैं तो स्वतंत्र जांच से यह बात और मजबूत होगी, वहीं यदि कहीं तकनीकी या बिलिंग संबंधी गड़बड़ी है तो उसका भी खुलासा हो सकेगा।
फिलहाल स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ सरकार और बिजली कंपनी इसे पारदर्शी व्यवस्था बता रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने बिजली बिलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में इस पूरे विवाद का समाधान केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही संभव माना जा रहा है।

