सूरजपुर/ओड़गी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत छतरंग स्थित शासकीय बालक आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आश्रम में रहने वाले बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आश्रम के रिकॉर्ड में जहां 48 बच्चों के दर्ज होने की बात सामने आई है, वहीं निरीक्षण के दौरान मौके पर सिर्फ 16 बच्चे मौजूद मिले। इसके अलावा बच्चों के लिए पर्याप्त बेड, गद्दे, मच्छरदानी और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।
मामले को और गंभीर बनाने वाला एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आश्रम के बच्चे कथित तौर पर गंदे तालाब के पानी में नहाते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि आश्रम में पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को नहाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचाई गई है और आश्रम की पूरी व्यवस्था की जांच कराने की मांग की गई है।
23 अगस्त को किया गया औचक निरीक्षण
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत छतरंग के सरपंच सुभाष सिंह मरकाम ने 23 अगस्त 2026 को आश्रम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें आश्रम की व्यवस्थाओं में कई तरह की कमियां नजर आने का दावा किया गया है। इसके बाद सरपंच ने मामले को जिला प्रशासन के संज्ञान में लाते हुए कलेक्टर से जांच की मांग की।
सरपंच की शिकायत के अनुसार आश्रम में बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या में बड़ा अंतर मिला। रिकॉर्ड में 48 बच्चे दर्ज बताए गए, लेकिन निरीक्षण के दौरान सिर्फ 16 बच्चे ही आश्रम में मिले। यानी दर्ज संख्या की तुलना में 32 बच्चे मौके पर अनुपस्थित पाए गए। इन बच्चों के अनुपस्थित रहने की वास्तविक वजह क्या थी, वे कहां थे और उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड किस तरह दर्ज किया गया, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी सामने नहीं आया है।
48 बच्चों में सिर्फ 16 की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
आश्रम जैसे आवासीय संस्थान में बच्चों की उपस्थिति और उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होती है। ऐसे में यदि रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या में इतना बड़ा अंतर हो, तो स्वाभाविक रूप से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अनुपस्थित 32 बच्चे छुट्टी पर थे, अपने घर गए थे, किसी अन्य कारण से बाहर थे या उनकी उपस्थिति को लेकर कोई और स्थिति थी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन बच्चों के संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस बिंदु पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
गंदे तालाब में नहाते दिखे बच्चे
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा बच्चों के नहाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पानी को लेकर है। सामने आए वीडियो में बच्चे तालाब के पानी में नहाते हुए नजर आ रहे हैं। शिकायत में इस पानी को गंदा बताया गया है।
अगर आश्रम में नियमित रूप से पर्याप्त और सुरक्षित पानी उपलब्ध नहीं है और बच्चों को तालाब में जाकर नहाना पड़ता है, तो यह उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन जाता है। गंदे पानी में नहाने से संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा हो सकता है। वहीं तालाब में बच्चों के नहाने के दौरान डूबने जैसी दुर्घटना की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि इस मामले में केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित स्नान स्थल और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की भी जांच जरूरी हो जाती है।
पीने के पानी की व्यवस्था पर भी सवाल
आश्रम में बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी शिकायत सामने आई है। किसी भी आवासीय आश्रम में पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था बुनियादी जरूरत है। बच्चों को यदि पीने के पानी के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो यह सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
शिकायत में पानी की समस्या को आश्रम की प्रमुख परेशानियों में शामिल किया गया है। बताया गया है कि पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने की वजह से बच्चों को नहाने के लिए आश्रम से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह सवाल है कि आश्रम में जलापूर्ति की वर्तमान स्थिति क्या है, पानी का स्रोत कौन सा है और बच्चों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
बेड, गद्दे और मच्छरदानी की कमी का आरोप
आश्रम में बच्चों के रहने की व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें की गई हैं। आरोप है कि बच्चों के लिए पर्याप्त बेड, गद्दे और मच्छरदानियां उपलब्ध नहीं हैं।
छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए सोने की उचित व्यवस्था और मच्छरों से बचाव की सुविधा सामान्य आवश्यकताओं में शामिल है। खासकर बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की स्थिति में मच्छरदानी की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि आश्रम में दर्ज बच्चों की संख्या के अनुरूप बिस्तर और अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो स्टॉक रजिस्टर, सामग्री वितरण और वास्तविक उपलब्धता की जांच करना भी जरूरी होगा।
अधीक्षक की कथित गैरहाजिरी पर भी सवाल
आश्रम की व्यवस्थाओं के साथ-साथ वहां पदस्थ अधीक्षक की मौजूदगी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सरपंच की शिकायत के अनुसार अधीक्षक चंद्रमणी खरे नियमित रूप से आश्रम में उपस्थित नहीं रहते। दावा किया गया है कि वे सप्ताह में केवल एक-दो दिन आश्रम आते हैं और वापस चले जाते हैं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जून 2026 में प्रभार संभालने के बाद से अधीक्षक ने रात में आश्रम में रुककर व्यवस्था की निगरानी नहीं की। हालांकि, यह शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी बाकी है।
ऐसे में जांच के दौरान अधीक्षक की उपस्थिति का रिकॉर्ड, ड्यूटी रजिस्टर, आश्रम में रात्रि ठहराव से संबंधित जानकारी और बच्चों की दैनिक देखरेख की व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक आश्रम की खराब व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यहां रहने वाले बच्चे सरकारी संरक्षण और आवासीय सुविधा के भरोसे हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा, भोजन, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रहने की व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और आश्रम प्रबंधन की होती है।
यदि बच्चों को वास्तव में नहाने के लिए असुरक्षित या गंदे तालाब का सहारा लेना पड़ रहा है, तो प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि आश्रम परिसर में पानी की समस्या क्यों बनी हुई है और इसे स्थायी रूप से दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
सरपंच ने कलेक्टर से की जांच की मांग
मामले को लेकर ग्राम पंचायत छतरंग के सरपंच सुभाष सिंह मरकाम ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर आश्रम की व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रशासन की टीम आश्रम का विस्तृत निरीक्षण करती है, तो बच्चों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति रजिस्टर, पेयजल व्यवस्था, बिस्तर और मच्छरदानियों की उपलब्धता, भोजन व्यवस्था तथा अधीक्षक की उपस्थिति समेत तमाम बिंदुओं की जांच की जा सकती है।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल छतरंग बालक आश्रम को लेकर सामने आई जानकारी मुख्य रूप से स्थानीय शिकायत, निरीक्षण के दावे और सामने आए वीडियो पर आधारित है। बच्चों की संख्या में अंतर, पानी की समस्या, तालाब में नहाने और अधीक्षक की कथित गैरमौजूदगी जैसे आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामला बच्चों से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन से उम्मीद है कि वह केवल शिकायत की जांच तक सीमित न रहते हुए आश्रम की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन करे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय करे।
सबसे जरूरी बात यह है कि आश्रम में रहने वाले बच्चों को स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित स्नान की सुविधा, पर्याप्त बिस्तर, मच्छरदानी और नियमित देखरेख जैसी बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध हों। बच्चों को गंदे तालाब के पानी में नहाने की मजबूरी न हो और उनकी सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता न किया जाए।
फिलहाल प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आश्रम की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

