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रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने वाले वीडियो को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के बाद मामले में FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ विवाद
मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram से जुड़ा बताया जा रहा है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सागर निर्मलकर नाम की Instagram ID से एक वीडियो पोस्ट किए जाने का आरोप है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
वीडियो के अलावा सोशल मीडिया पोस्ट पर कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक कमेंट किए जाने की भी शिकायत सामने आई है। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
राष्ट्रवादी विचारक वीरेंद्र दुबे ने थाने में दी शिकायत
इस मामले को लेकर राष्ट्रवादी विचारक एवं छत्तीसगढ़ राष्ट्रवादी संघ के संयोजक वीरेंद्र दुबे ने रायपुर के सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दी।
शिकायत में वीडियो और उससे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने इसे संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी बताते हुए संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।
अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अमर्यादित भाषा का सवाल
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भाषा की मर्यादा को लेकर बहस भी छेड़ दी है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और जनप्रतिनिधियों की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन आलोचना की आड़ में गाली-गलौज या व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
वीरेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर प्रदेश सरकार और सरकार से जुड़े वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाकर आपत्तिजनक टिप्पणियों का सिलसिला देखने को मिल रहा है। उन्होंने ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस तक पहुंचा मामला, FIR के बाद जांच शुरू
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
अब पुलिस की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित वीडियो किसने बनाया या पोस्ट किया, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट किसके नाम पर है और वीडियो में इस्तेमाल की गई सामग्री की वास्तविकता क्या है।
सोशल मीडिया पोस्ट पर भी पुलिस की नजर
मामले में केवल वीडियो ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े कमेंट और सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। खासतौर पर मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री वायरल होने के बाद पुलिस कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
शिकायतकर्ता ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
वीरेंद्र दुबे ने कहा है कि भविष्य में मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के खिलाफ इसी तरह की अमर्यादित टिप्पणी दोहराई गई तो ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से भी जिम्मेदारी के साथ पोस्ट और कमेंट करने की अपील की।
फिलहाल जांच पर टिकी नजर
FIR दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की जांच पुलिस के हाथ में है। जांच के दौरान वीडियो की उत्पत्ति, सोशल मीडिया अकाउंट और कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। FIR दर्ज होना आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होना नहीं है; अंतिम स्थिति पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
यह खबर उपलब्ध शिकायत, मीडिया रिपोर्टों और पुलिस कार्रवाई की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

