रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों द्वारा बिजली बिल का समय पर भुगतान नहीं किए जाने से राज्य की बिजली वितरण कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव बन गया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं पर बिजली बिल का बकाया करीब 3 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे अधिक बकाया नगरीय निकायों पर है, जिन पर 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल लंबित बताया गया है।
जानकारी के मुताबिक बिजली कंपनी लगातार संबंधित विभागों को नोटिस और भुगतान संबंधी पत्र भेज रही है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी राशि अब भी वसूली नहीं हो सकी है। इससे कंपनी के नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) पर असर पड़ रहा है और संचालन व रखरखाव के कार्य भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
चार महीनों में बढ़ा बकाया
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक सरकारी विभागों पर लगभग 2,444.91 करोड़ रुपये का बकाया था। इसके बाद अप्रैल, मई, जून और जुलाई के दौरान भी भुगतान अपेक्षित गति से नहीं हुआ, जिससे बकाया बढ़कर करीब 2,983.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी केवल चार महीनों में ही बकाया राशि में 500 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा बकाया नगरीय निकायों पर
बिजली कंपनी के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक बकाया नगरीय निकायों पर है। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), जल संसाधन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, सिंचाई, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी विभागों पर भी करोड़ों रुपये के बिजली बिल लंबित हैं।
बिजली कंपनी पर बढ़ा आर्थिक दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं से मिलने वाले राजस्व के आधार पर बिजली खरीद, रखरखाव और नई परियोजनाओं का संचालन करती हैं। ऐसे में सरकारी विभागों का लगातार बढ़ता बकाया कंपनी की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो विकास कार्यों और बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
समय पर भुगतान की जरूरत
बिजली कंपनी ने संबंधित विभागों से बकाया राशि जल्द जमा कराने का आग्रह किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर भुगतान होता है तो बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और नई परियोजनाओं के संचालन में आसानी होगी। सरकार स्तर पर भी बकाया राशि के निपटारे को लेकर चर्चा चल रही है।

