गिरीश गुप्ता गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक से विकास के दावों को आईना दिखाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पैरी नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से बनाया जा रहा पुल वर्षों से अधूरा पड़ा है। पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण आसपास के गांवों के स्कूली बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। बारिश के दिनों में जब पैरी नदी उफान पर होती है, तब बच्चों की यह परेशानी और भी खतरनाक हो जाती है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि बच्चों को अधूरे पुल के करीब 20 फीट ऊंचे हिस्से तक पहुंचने के लिए लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। छोटे-छोटे बच्चे स्कूल बैग लेकर इस सीढ़ी से ऊपर चढ़ते और फिर नीचे उतरते हैं। जरा सी चूक होने पर गंभीर हादसा हो सकता है।
5 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है पुल
मैनपुर क्षेत्र में देहागुड़ा-खखराभाषा मार्ग पर पैरी नदी के ऊपर पुल निर्माण की योजना बनाई गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार के बजट दस्तावेज में इस पुल के लिए ₹500 लाख यानी करीब 5 करोड़ रुपये की लागत दर्ज है। इसके बावजूद निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण पूरा हो जाने से आसपास के कई गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर बारिश के मौसम में नदी पार करने की समस्या खत्म हो सकती है और स्कूली बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिल सकता है। लेकिन निर्माण में लगातार देरी के कारण लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
बच्चों के सामने सबसे बड़ा खतरा
बारिश के मौसम में पैरी नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। नदी में तेज बहाव के बीच बच्चों का आवागमन बेहद जोखिम भरा हो जाता है। इसके बावजूद स्कूल जाने वाले बच्चों के पास सुरक्षित रास्ते का विकल्प नहीं है।
अधूरे पुल के हिस्से में लगी लोहे की सीढ़ी से बच्चों को ऊपर-नीचे जाना पड़ता है। कई बच्चे छोटे हैं और उनके साथ भारी स्कूल बैग भी होता है। ऐसे में सीढ़ी पर पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने की स्थिति में बच्चा सीधे नीचे गिर सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन पुल में कई जगह लोहे की सरिया और अन्य निर्माण सामग्री भी खुली अवस्था में पड़ी है। इससे भी हादसे का खतरा बना हुआ है।
गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक में
5 करोड़ की लागत से बन रहा
पैरी नदी का पुल 5 साल से अधूरा है
जिससे मासूम बच्चे 20 फिट ऊपर
लोहे की सीढ़ी चढ़ उफनती के बीच
जान जोखिम स्कूल जाने को मजबूर है
PWD विभाग और मंत्री जी फाइलों
में विकास की रफ्तार जैसी भी हो
जमीनी हकीकत बच्चों की जान दांव पर है। pic.twitter.com/Y59oH74Jm0
— CG_04 (@CG_wasi) September 1, 2026
कई साल से पूरा नहीं हुआ निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक पुल का निर्माण कई वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। स्थानीय स्तर पर इसे करीब 5 से 6 साल से अधूरा बताया जा रहा है। इस दौरान कई बार निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग उठ चुकी है।
बताया जाता है कि करीब एक वर्ष पहले क्षेत्रीय विधायक जनक ध्रुव और तत्कालीन गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। उस समय संबंधित निर्माण एजेंसी और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। निर्माण एजेंसी की ओर से भी काम को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया था।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद पुल का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
बारिश में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी
पैरी नदी पर पुल नहीं होने के कारण सिर्फ स्कूली बच्चों को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों का आवागमन भी प्रभावित होता है। बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों के लिए बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि उन्हें रोजाना स्कूल जाने के लिए इस जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार करोड़ों रुपये की लागत से पुल निर्माण की योजना बनाती है तो उसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवागमन उपलब्ध कराना होता है। लेकिन वर्षों तक निर्माण अधूरा रहने से योजना का वास्तविक लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों में नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी
पुल निर्माण में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। रिपोर्टों के मुताबिक ग्रामीणों ने NH-130C पर आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी भी दी है।
जिम्मेदार विभाग से उठ रहे सवाल
पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ा है। ऐसे में निर्माण में हो रही देरी को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर करोड़ों रुपये की स्वीकृत लागत वाली परियोजना वर्षों बाद भी पूरी क्यों नहीं हो सकी? निर्माण की समयसीमा क्या थी? अब तक कितना काम पूरा हुआ और कितना बाकी है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब ग्रामीण चाहते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी दिन लोहे की सीढ़ी से स्कूल जाते समय कोई बच्चा हादसे का शिकार हो गया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि विकास सिर्फ फाइलों और सरकारी योजनाओं में दिखाई नहीं देना चाहिए, बल्कि उसका लाभ जमीन पर भी नजर आना चाहिए। पैरी नदी पर अधूरा पुल इसी विरोधाभास की तस्वीर पेश कर रहा है।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग पर है। लोगों को उम्मीद है कि बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और पुल निर्माण को जल्द पूरा कराने के साथ बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की तत्काल व्यवस्था करेगा।

