कांकेर/भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ में गांजे की अवैध खेती को लेकर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में भानुप्रतापपुर क्षेत्र में पुलिस ने एक खेत में दबिश देकर बड़ी मात्रा में गांजे के पौधे जब्त किए हैं। बताया गया है कि खेत में अरहर और चेंच भाजी की फसल के बीच गांजे के पौधे लगाए गए थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने कुल 844 गांजे के पौधे जब्त किए हैं। मामले में एक किसान को गिरफ्तार किया गया है।
समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, भानुप्रतापपुर के ग्राम मुरमुराटोला में पुलिस को खेत में गांजे की खेती किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत की जांच की। जांच के दौरान अरहर और चेंच भाजी की फसल के बीच बड़ी संख्या में गांजे के पौधे दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने खेत में मौजूद गांजे के पौधों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की।
खेत में छिपाकर की जा रही थी गांजे की खेती
बताया गया है कि गांजे के पौधों को सामान्य फसलों के बीच इस तरह लगाया गया था कि बाहर से देखने पर खेत सामान्य नजर आए। अरहर और चेंच भाजी के पौधों के बीच गांजे की खेती किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गांजे के पौधों की गिनती की, जिसके बाद कुल 844 पौधे जब्त किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, जब्त गांजे के पौधों का कुल वजन करीब 8.50 किलोग्राम बताया गया है। पुलिस ने जब्त पौधों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अपने कब्जे में लिया है। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद किसान को गिरफ्तार किया गया।
42 वर्षीय किसान गिरफ्तार
पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुभाष कोरोटी, उम्र 42 वर्ष के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आरोपी से पूछताछ भी की। समाचार रिपोर्ट में उल्लेख है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने गांजे की खेती से जुड़े सवालों पर जवाब दिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खेत में गांजे की खेती कब से की जा रही थी और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं थी।
बीज से पौधे तैयार करने की बात सामने आई
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने पुलिस पूछताछ में गांजे के पौधों को तैयार करने को लेकर जानकारी दी। समाचार में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने करीब चार माह पूर्व बीज लाकर उन्हें नर्सरी के रूप में तैयार किया था, जिसके बाद खेत में पौधे लगाए गए।
हालांकि, गांजे की खेती के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और तैयार पौधों को कहां खपाया जाना था, इसका खुलासा पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। पुलिस द्वारा जब्त किए गए पौधों और अन्य सामग्री को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस ने मौके पर की कार्रवाई
गांजे की खेती की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत की जांच की। कार्रवाई के दौरान खेत में लगे गांजे के पौधों को एक-एक कर जब्त किया गया। समाचार रिपोर्ट में पुलिस द्वारा मौके पर मोबाइल फोरेंसिक टीम से जांच कराए जाने का भी उल्लेख है। जांच में गांजा होने की पुष्टि से संबंधित प्रक्रिया पूरी की गई।
पुलिस ने जब्त पौधों का वजन भी कराया। रिपोर्ट में इसका कुल वजन करीब 8.50 किलोग्राम बताया गया है। इसके बाद आरोपी किसान को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
गांजे की खेती पर कानून में सख्त प्रतिबंध
भारत में गांजे की अवैध खेती और उससे जुड़े कारोबार पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज एक्ट (NDPS Act), 1985 के तहत गांजे से जुड़े अवैध उत्पादन, खेती, कब्जे, परिवहन और कारोबार पर कार्रवाई की जाती है।
समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, देश में गांजे की खेती पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी कुछ क्षेत्रों में चोरी-छिपे इसकी खेती के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां समय-समय पर ऐसे मामलों में कार्रवाई करती हैं।
सामान्य फसल के बीच गांजे की खेती चुनौती
इस मामले ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि सामान्य कृषि फसलों के बीच छिपाकर गांजे की खेती किए जाने पर निगरानी किस तरह बढ़ाई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत बड़े क्षेत्र में फैले होने के कारण हर खेत की लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाएं पुलिस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गांजे के पौधे कई बार सामान्य हरियाली या अन्य फसलों के बीच आसानी से नजर नहीं आते। समाचार में कृषि विशेषज्ञ के हवाले से यह भी बताया गया है कि अरहर की खुशबू में गांजे की गंध दब सकती है, जिसके कारण आसपास से गुजरने वाले लोगों को भी इसकी पहचान आसानी से नहीं हो पाती।
हालांकि किसी पौधे की पहचान केवल दूर से देखने या गंध के आधार पर करना विश्वसनीय तरीका नहीं है। वास्तविक पुष्टि जांच और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती है।
सात माह में कई मामले सामने आने का दावा
समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के एक बॉक्स में पिछले कुछ महीनों के दौरान गांजे की खेती या जब्ती से जुड़े कई मामलों का उल्लेख किया गया है। इनमें 20 फरवरी को कांकेर में करीब 350 पौधों समेत 17 लाख रुपये का गांजा, 7 अप्रैल को कोरार में दो आरोपियों से 16.50 लाख रुपये का गांजा तथा 24 अप्रैल को मचांदूर क्षेत्र में बाड़ी से छह पौधों समेत 48,500 रुपये का गांजा जब्त किए जाने का उल्लेख है।
इन घटनाओं का उल्लेख इस बात की ओर संकेत करता है कि क्षेत्र में गांजे से संबंधित अवैध गतिविधियों पर पुलिस की नजर बनी हुई है। हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां और कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच आगे बढ़ेगी
भानुप्रतापपुर के इस मामले में 844 गांजे के पौधों की जब्ती को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच का अगला चरण यह पता लगाना होगा कि आरोपी तक गांजे के बीज कैसे पहुंचे, पौधे तैयार करने में किसकी मदद ली गई और तैयार फसल को आगे कहां बेचने की योजना थी।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपी पहले से इस तरह की गतिविधि में शामिल था या यह पहली बार गांजे की खेती करने का मामला है। यदि जांच में किसी नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो कार्रवाई का दायरा आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने खेत से 844 गांजे के पौधे जब्त कर 42 वर्षीय किसान सुभाष कोरोटी को गिरफ्तार किया है। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

