रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम की लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड क्रमांक-52 के अमलीडीह इलाके में खुली और गहरी नाली में गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि जिस नाली में बच्चा गिरा, उसे ढंकने की मांग स्थानीय लोगों ने पहले ही नगर निगम प्रशासन से की थी। मामला सुशासन तिहार में भी शिकायत के रूप में पहुंचा था, लेकिन इसके बावजूद नाली को कवर नहीं किया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक, अमलीडीह की गली नंबर-5 में सोमवार को करीब साढ़े चार साल का बच्चा काव्यांश खेलते समय नाली में गिर गया। बताया गया कि बच्चा नाली के बहाव के साथ आगे निकल गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
करीब 3 फीट चौड़ी और 4 फीट गहरी है नाली
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस नाली में हादसा हुआ, उसकी चौड़ाई करीब तीन फीट और गहराई लगभग चार फीट है। नाली कई जगह से खुली हुई है। बारिश के दौरान स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पानी सड़क तक भर जाता है और खुली नाली का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार अमलीडीह की इस नाली की लंबाई करीब 500 मीटर है। बारिश के मौसम में पानी का बहाव ठीक से नहीं होने के कारण सड़क पर भी पानी भर जाता है। इससे राहगीरों और खासकर बच्चों के लिए खतरा लगातार बना हुआ था।
सुशासन तिहार में भी की गई थी शिकायत
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नाली को कवर करने की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रिपोर्ट के अनुसार वार्ड के लोगों ने करीब चार महीने पहले नाली को कवर कराने की मांग राज्य सरकार द्वारा चलाए गए सुशासन तिहार में की थी। स्थानीय लोगों ने जनसमस्या निवारण शिविर में भी इस समस्या की शिकायत की थी।
इसके अलावा स्थानीय पार्षद विनय निर्मलकर ने भी पिछली सामान्य सभा की बैठक में नाली कवर कराने का मुद्दा उठाया था। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने की बात भी सामने आई थी, लेकिन नाली को ढंकने का काम समय पर नहीं हो सका। आखिरकार यही लापरवाही एक मासूम बच्चे की जान पर भारी पड़ गई।
हर साल नाली कवर करने के लिए करोड़ों का प्रावधान
रिपोर्ट में नगर निगम के बजट से जुड़े आंकड़े भी सवाल खड़े करते हैं। नगर निगम के सालाना बजट में छोटी नालियों को कवर करने के लिए हर वर्ष औसतन 1 से 3 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए करीब 1 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए थे। इससे पहले 2021-22 के बजट में भूमिगत नाली योजना के लिए 475 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। वहीं 2023-24 में सामान्य नाली संधारण के लिए करीब 1 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया। 2024-25 के बजट में भूमिगत नाली संधारण, मरम्मत और नालियों की सफाई के लिए करीब 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम ने पूंजीगत व्यय के तहत सीवरेज सिस्टम निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये का एक नया प्रस्ताव भी शामिल किया था। इसके बावजूद शहर की कई नालियां अब भी खुली पड़ी हैं।
बारिश में सड़क पर भर जाता है पानी
अमलीडीह की गली नंबर-5 में समस्या सिर्फ खुली नाली तक सीमित नहीं है। बारिश के दौरान नाली का पानी सड़क पर भर जाता है। करीब 500 मीटर लंबी नाली होने के बावजूद पानी का प्रवाह सही तरीके से नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के समय नाली में तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है। ऐसे में सड़क और नाली के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। यही स्थिति बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
पार्षद ने भी उठाया था मुद्दा
स्थानीय पार्षद विनय निर्मलकर ने सामान्य सभा की बैठक में इस समस्या को उठाते हुए नाली को कवर करने का प्रस्ताव रखा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि नाली कवर करने के लिए एक बार टेंडर प्रक्रिया भी हुई थी, लेकिन ठेकेदार ने काम नहीं किया। इसके बाद नाली को कवर करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अब बच्चे की मौत के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि शिकायत मिलने और जनप्रतिनिधि द्वारा मामला उठाए जाने के बावजूद खतरनाक खुली नाली को समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।
हादसे के बाद उठे कई सवाल
इस घटना ने नगर निगम की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी क्षेत्र में खुली और गहरी नाली की शिकायत पहले ही मिल चुकी थी, तो क्या निगम की जिम्मेदारी नहीं थी कि हादसा होने से पहले उसे ढंकने या सुरक्षित करने की व्यवस्था करता?
सुशासन तिहार का उद्देश्य ही आम लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है। छत्तीसगढ़ शासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सुशासन तिहार-2026 का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है।
लेकिन अमलीडीह की घटना में शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब जरूरत है कि सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय शहर की सभी खुली और गहरी नालियों का सर्वे कराया जाए और जहां भी खतरा है, वहां तत्काल सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
एक मासूम की जान चली गई, लेकिन सवाल अब भी वही है—जब शिकायत पहले ही मिल चुकी थी, तो नाली को हादसे से पहले क्यों नहीं ढंका गया?

