गरियाबंद/धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) प्रशासन ने संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर पक्की सड़क, पारंपरिक विद्युत अवसंरचना और अन्य गैर-वानिकी विकास कार्यों की मांगों को लेकर आम जनता, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से संवेदनशीलता बरतने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि टाइगर रिजर्व केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि मध्य भारत की एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक धरोहर है, जिसकी सुरक्षा लाखों लोगों की जल एवं पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार उदंती-सीतानदी क्षेत्र महानदी, सोंढूर, पैरी और तेल जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम एवं जलग्रहण क्षेत्र है। यह क्षेत्र भूजल पुनर्भरण, जलवायु संतुलन, मृदा संरक्षण और कार्बन अवशोषण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है। यहां एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू, वन भैंसा, मालाबार पाइड हॉर्नबिल, विशाल एवं उड़न गिलहरी सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है।
प्रशासन ने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि वन्यजीव आवासों के भीतर सड़क, बिजली लाइन और अन्य स्थायी निर्माण कार्यों से आवास खंडित होते हैं तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है। वर्तमान में रिजर्व क्षेत्र में 50 से अधिक हाथी, लगभग 200 तेंदुए और 1000 से अधिक भालू निवास करते हैं। विभागीय प्रयासों और आधुनिक तकनीकों की मदद से पिछले चार वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित रखा गया है, लेकिन बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप से यह संतुलन बिगड़ सकता है।
प्रेस नोट में यह भी उल्लेख किया गया है कि टाइगर रिजर्व का संचालन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा भी संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
रिजर्व प्रशासन ने बताया कि राजापड़ाव, शोभा, अड़गड़ी, गोना गरिबा और कोडोमाली जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से अतिक्रमण का दबाव बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में 300 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराकर महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों को पुनर्स्थापित किया गया है। विभाग ने नागरिकों से अवैध अतिक्रमण, अवैध वृक्ष कटाई और शिकार गतिविधियों को रोकने में सहयोग की अपील की है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन का मानना है कि क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल सकते हैं। प्रशासन ने कहा कि अल्पकालिक विकास कार्यों की तुलना में संरक्षण आधारित विकास मॉडल क्षेत्र के लिए अधिक लाभकारी होगा और भविष्य में स्थानीय समुदायों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण कानूनों से समझौता किए बिना ही विकास के विकल्प तलाशे जा सकते हैं। प्रशासन ने सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय पारिस्थितिक धरोहर के संरक्षण में सहयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन सुरक्षित रखा जा सके।

