गिरीश गुप्ता गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, पहली से आठवीं तक की पढ़ाई महज तीन कमरों में संचालित; ग्रामीणों ने नए भवन की मांग की
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत साहेबिनकछार में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां जर्जर स्कूल भवन के कारण 77 बच्चों को परेशानी के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है। बारिश के दौरान स्कूल की छत से पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे बच्चों और शिक्षकों के लिए परेशानी के साथ सुरक्षा का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की हालत लंबे समय से खराब है। भवन की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसमें नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना सुरक्षित नहीं माना जा रहा। इसके चलते पहली से आठवीं तक की कक्षाओं को उपलब्ध सीमित कमरों में संचालित करने की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
तीन कमरों में आठ कक्षाओं का संचालन
ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल में पहली से आठवीं तक के 77 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन सभी कक्षाओं के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं होने के कारण मिडिल स्कूल के महज तीन कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
एक ही समय में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को सीमित जगह में बैठाने से पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग कक्षा-कक्ष और पर्याप्त स्थान की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में स्कूल प्रबंधन के सामने सीमित संसाधनों में पढ़ाई जारी रखने की चुनौती बनी हुई है।

बारिश में टपकती है छत, बच्चों की सुरक्षा पर चिंता
बारिश का मौसम शुरू होते ही जर्जर भवन की समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर छत से पानी रिसता है। ऐसे में बच्चों को कक्षा में बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी चुनौती बन जाता है।
जर्जर भवन में पानी का रिसाव, कमजोर छत और भवन की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों को आशंका है कि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि स्कूल भवन की स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाना चाहिए और यदि भवन असुरक्षित है तो बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने कई बार उठाई स्कूल भवन की मांग
पूर्व सरपंच रूपसिंह माझी सहित ग्रामीणों ने स्कूल भवन की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किए जाने की बात कही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से नए और सुरक्षित स्कूल भवन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र आदिवासी बहुल है और यहां के बच्चों के लिए स्कूल ही शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में यदि स्कूल भवन ही सुरक्षित नहीं होगा तो बच्चों की नियमित पढ़ाई और उनके भविष्य पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।
शिक्षा व्यवस्था के दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
सरकार ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की सुविधाएं बेहतर करने तथा बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के दावे करती है। ऐसे में साहेबिनकछार जैसे गांव में जर्जर भवन और सीमित कमरों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पढ़ाई होना व्यवस्था के सामने सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब किसी सरकारी स्कूल का भवन जर्जर स्थिति में पहुंच जाता है तो उसकी मरम्मत या नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया समय पर क्यों पूरी नहीं होती? यदि भवन बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
हादसे से पहले हो स्थायी समाधान
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्कूल भवन का निरीक्षण करे। भवन की तकनीकी स्थिति की जांच के बाद यदि वह असुरक्षित पाया जाता है तो बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पढ़ाने की व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही स्कूल के लिए पर्याप्त संख्या में कक्षा-कक्ष उपलब्ध कराने और आवश्यकतानुसार नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए। 77 बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल भवन की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और साहेबिनकछार के बच्चों को सुरक्षित एवं पर्याप्त स्कूल भवन की सुविधा कब मिलती है।
नोट: स्कूल भवन की वर्तमान तकनीकी स्थिति, मरम्मत/नए भवन के प्रस्ताव और विभागीय कार्रवाई के संबंध में संबंधित शिक्षा विभाग एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
The above story first appeared on cgtop36.com on 8 August 2026. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website cgtop36.com.

