उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा का इलेक्ट्रिक उड़ने वाला वाहन इन दिनों चर्चा में है। अगस्त 2026 में इसके प्रोटोटाइप की लगभग एक मिनट की परीक्षण उड़ान की खबरें सामने आई थीं। सोशल मीडिया पर इसे ‘स्वदेशी फ्लाइंग कार’ और बिना इंजीनियरिंग की डिग्री के तैयार किया गया आविष्कार बताया जा रहा है। हालांकि, इसकी तकनीक, विदेशी पुर्जों के इस्तेमाल और व्यावसायिक क्षमता को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
इंटरनेट से सीखी तकनीक, तैयार किया उड़ने वाला वाहन
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रवि टम्टा ने इंटरनेट से तकनीकी जानकारी जुटाकर और लगातार प्रयोग करके HAPIDA SKYNeX नाम का सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक उड़ने वाला वाहन तैयार किया है। अगस्त 2026 में इसकी परीक्षण उड़ान की खबरें सामने आई थीं। इस दौरान वाहन ने लगभग एक मिनट तक हवा में उड़ान भरी।
रिपोर्टों में रवि टम्टा को बीए पास बताया गया है। उनके इस प्रयास की खास बात यह है कि उन्होंने पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा के बजाय स्व-अध्ययन और व्यावहारिक प्रयोगों के जरिए इस तकनीक पर काम किया।
हालांकि, किसी वाहन का हवा में उड़ना और उसका सुरक्षित यात्री परिवहन के लिए तैयार होना अलग-अलग बातें हैं।
क्या पूरा वाहन चीन से आया है?
रवि टम्टा के आविष्कार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके स्वदेशी होने पर हो रही है। सोशल मीडिया पर इसे चीन से आयातित बताने वाले दावे सामने आए हैं। दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रवि टम्टा ने पूरे वाहन को चीन से आयात करने की बात से इनकार किया है और अपनी निर्माण इकाई देखने के लिए लोगों को आमंत्रित किया है।
कुछ रिपोर्टों में विदेश से तकनीकी जानकारी और कुछ उपकरण या पुर्जे लाने का उल्लेख भी मिलता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि वाहन के कौन-कौन से पुर्जे किस देश में बने हैं और इसमें आयातित सामग्री का कितना हिस्सा है।
इसलिए इसे पूरी तरह चीन से खरीदा हुआ बताना या बिना प्रमाण के पूरी तरह स्वदेशी घोषित करना, दोनों ही जल्दबाजी होगी।
क्या है eVTOL तकनीक?
eVTOL का पूरा नाम इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग है। इस तकनीक में बिजली से चलने वाले मोटर और प्रोपेलर की मदद से वाहन सीधे जमीन से ऊपर उठ सकता है और नीचे उतर सकता है।
रवि टम्टा के वाहन को मल्टीरोटर ड्रोन तकनीक पर आधारित बताया जा रहा है। हालांकि, इसे सामान्य कार की तरह सड़क पर चलने और फिर आसमान में उड़ने वाला प्रमाणित वाहन मानना अभी सही नहीं होगा। फिलहाल इसे इलेक्ट्रिक हवाई वाहन का प्रोटोटाइप कहना अधिक उचित है।
200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का दावा कितना सही?
कुछ रिपोर्टों में वाहन की संभावित गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है। लेकिन इस दावे की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र तकनीकी परीक्षणों के विस्तृत परिणाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।
वाहन की वास्तविक क्षमता जानने के लिए उसकी उड़ान अवधि, एक बार चार्ज करने पर तय की जाने वाली दूरी, भार उठाने की क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा का परीक्षण जरूरी है।
व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले जरूरी मंजूरी
किसी हवाई वाहन को आम लोगों के परिवहन के लिए इस्तेमाल करने से पहले उसकी संरचनात्मक मजबूती, बैटरी, मोटर, उड़ान नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियों की जांच आवश्यक होती है। इसके अलावा, भारत में लागू विमानन नियमों के तहत जरूरी मंजूरियां भी लेनी होंगी।
फिलहाल उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रोटोटाइप को व्यावसायिक उड़ानों के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं।
निष्कर्ष: उपलब्धि महत्वपूर्ण, लेकिन दावों की पुष्टि जरूरी
रवि टम्टा का इलेक्ट्रिक उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप तैयार करना और उसकी परीक्षण उड़ान करना एक उल्लेखनीय प्रयास है। लेकिन इसे पूरी तरह स्वदेशी फ्लाइंग कार या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार तकनीक बताने से पहले स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रवि टम्टा ने इलेक्ट्रिक मल्टीरोटर तकनीक पर आधारित उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप विकसित किया है। इसके सभी पुर्जों के स्वदेशी होने, वास्तविक प्रदर्शन और व्यावसायिक उपयोग की तैयारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त प्रमाणों की आवश्यकता है।

