उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 3,500 से अधिक पेड़ गर्डलिंग से प्रभावित; पेड़ों को बचाने कर्नाटक के विशेषज्ञ विजय निशांत करेंगे दौरा
गिरिश गुप्ता | गरियाबंद
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के करका क्षेत्र में वन अतिक्रमण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध सर्वेक्षण संबंधी जानकारी के अनुसार, करका में अतिक्रमण का क्षेत्रफल वर्ष 2016 में 22 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 102.47 हेक्टेयर हो गया है। वहीं, वर्ष 2016 से 2026 के बीच प्रभावित क्षेत्र में 1.25 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का अनुमान जताया गया है।
वन क्षेत्र में पेड़ों को बचाने के लिए अब विशेष संरक्षण पहल की जा रही है। इसके तहत कर्नाटक के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत अगले सप्ताह टाइगर रिजर्व का दौरा करेंगे। वह प्रभावित पेड़ों की स्थिति का आकलन करने के साथ उन्हें बचाने के लिए वैज्ञानिक उपचार और वृक्ष-सर्जरी की तकनीकों पर मार्गदर्शन देंगे।

10 वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़ा अतिक्रमण
करका क्षेत्र में वन अतिक्रमण का विस्तार वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में यहां अतिक्रमण का क्षेत्रफल 22 हेक्टेयर था। वर्ष 2026 में यह बढ़कर 102.47 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
इस तरह लगभग एक दशक में अतिक्रमित क्षेत्रफल चार गुने से भी अधिक हो गया है। क्षेत्र में वन क्षरण की स्थिति का आकलन करने के लिए DGPS तकनीक से लैस ड्रोन सर्वेक्षण किया गया। इसके साथ वर्ष 2010 और 2016 की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट इमेजरी का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
इस अध्ययन के आधार पर वर्ष 2016 से 2026 के बीच प्रभावित क्षेत्र में 1.25 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा अनुमानित है और इसकी अंतिम पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक आकलन महत्वपूर्ण होगा।
3,500 से अधिक पेड़ों की छाल काटकर पहुंचाया नुकसान
टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निरीक्षणों में 3,500 से अधिक पेड़ गर्डलिंग से प्रभावित पाए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से साल, बीजा और तेंदू के पेड़ शामिल हैं।
गर्डलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पेड़ के तने के चारों ओर छाल की एक पट्टी हटा दी जाती है। इससे पेड़ के भीतर पोषक तत्वों के परिवहन की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। नुकसान अधिक होने पर पेड़ धीरे-धीरे सूख सकता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
वन विभाग के निरीक्षणों के अनुसार, कुछ पेड़ कई वर्षों से इस तरह की क्षति का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ पर हाल ही में छाल हटाए जाने के संकेत मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि वन भूमि पर अतिक्रमण बढ़ाने के उद्देश्य से भी पेड़ों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया हो सकता है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकेगी।

पेड़ों को बचाने कर्नाटक के विशेषज्ञ करेंगे मदद
वनों को हुए नुकसान के बीच प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कर्नाटक के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत, जो प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन के माध्यम से वृक्ष संरक्षण के कार्यों से जुड़े हैं, अगले सप्ताह उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुंचेंगे।
उनके दौरे के दौरान गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन पेड़ों को वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञ प्रभावित पेड़ों के उपचार, वृक्ष-सर्जरी और पुनर्जीवन की संभावनाओं पर तकनीकी सलाह देंगे। साथ ही, टाइगर रिजर्व के मैदानी कर्मचारियों को भी उपचार की विभिन्न प्रक्रियाओं, उपचार के बाद देखभाल और पेड़ों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के संबंध में प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
ब्रिज ग्राफ्टिंग से पहले भी हो चुका है प्रयास
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वर्ष 2022 में तौरेंगा रेंज में गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल किया था। इस तकनीक में पेड़ के क्षतिग्रस्त हिस्से के ऊपर और नीचे के जीवित ऊतकों के बीच संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि पोषक तत्वों का परिवहन दोबारा शुरू हो सके।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रयास में सफलता की दर लगभग 10 प्रतिशत रही। इस अनुभव से स्पष्ट हुआ कि प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए अधिक विशेषज्ञता, उपयुक्त तकनीक और उपचार के बाद बेहतर देखभाल की जरूरत है।
अब विजय निशांत के प्रस्तावित दौरे से उम्मीद है कि पेड़ों की स्थिति के अनुसार अधिक प्रभावी उपचार पद्धतियों की पहचान की जा सकेगी।
65 प्रतिशत पद रिक्त, फिर भी 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि अतिक्रमण मुक्त
वन संरक्षण के सामने चुनौतियां केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टाइगर रिजर्व में मैदानी अमले के लगभग 65 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसके बावजूद USTR प्रशासन ने पिछले चार वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।
इस दौरान वन संरक्षण दल पर पांच घातक हमले होने की जानकारी भी दी गई है। प्रशासन को कार्रवाई के दौरान विभिन्न आरोपों और विवादों का सामना करना पड़ा है।
वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रयासों को बाघ, हाथी, भारतीय विशाल गिलहरी और मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसे वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वन क्षेत्र का संरक्षण इन प्रजातियों के प्राकृतिक आवास और उनके सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी है।
पारंपरिक वन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
पेड़ों को बचाने की इस पहल में वैज्ञानिक तकनीकों के साथ स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले आदिवासी समुदायों और वनवासियों से पेड़ों की देखभाल, उपचार और संरक्षण से संबंधित उनके अनुभवों पर चर्चा की जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिक ज्ञान और वैज्ञानिक पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
ड्रोन सर्वेक्षण, वृक्ष-सर्जरी, प्रभावित पेड़ों की नियमित निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के जरिए वन पुनर्स्थापन के प्रयासों को मजबूत करने की योजना है।
महानदी के उद्गम क्षेत्र के संरक्षण पर जोर
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां वन क्षरण और अतिक्रमण का बढ़ना वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
करका क्षेत्र में अतिक्रमण की रोकथाम, क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने और वन भूमि के पुनर्स्थापन के प्रयास आने वाले समय में कितने प्रभावी साबित होते हैं, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल, 1.25 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का अनुमान और 3,500 से ज्यादा पेड़ों के गर्डलिंग से प्रभावित होने की जानकारी वन संरक्षण की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। विशेषज्ञों के प्रस्तावित दौरे से प्रभावित पेड़ों को बचाने की संभावनाओं का वैज्ञानिक आकलन होने की उम्मीद है।

