इंदौर। श्री गोविंदराम सेकसारिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) में आयोजित वार्षिक तकनीकी उत्सव ‘आरोहण 2026’ के तहत मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश भर के युवा डेलीगेट्स ने वैश्विक कूटनीति से लेकर भारत के प्राचीन इतिहास पर गहन मंथन किया। इस वर्ष की कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा आकर्षण ‘महाभारत समिति’ (Mahabharata Committee) रही, जहां ऐतिहासिक प्रसंगों के जरिए आधुनिक नेतृत्व, कूटनीति और नैतिकता के पाठ पर चर्चा की गई।
थीम ‘PRISM’ पर आधारित था पूरा मंथन
इस वर्ष की MUN कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय (Theme) ‘PRISM’ तय किया गया था। इसका उद्देश्य युवाओं में शांति (Peace), अधिकार (Rights), अखंडता (Integrity), कूटनीति (Diplomacy) और नैतिकता (Morality) के मूल्यों को बढ़ावा देना था।
कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्रों के बौद्धिक विकास और वैश्विक समझ को परखने के लिए चार प्रमुख समितियों का गठन किया गया था:
- DISEC: निशस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा समिति
- UNHRC: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद
- लोकसभा: भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा के लिए
- महाभारत समिति: प्राचीन इतिहास से आधुनिक प्रबंधन के गुर सीखने के लिए
महाभारत समिति: जब युवाओं ने महाकाव्य से निकाले कूटनीति के सूत्र
आमतौर पर MUN में अंतरराष्ट्रीय और वर्तमान राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होती है, लेकिन SGSITS के इस मंच पर ‘महाभारत समिति’ ने युवाओं को एक बिल्कुल नया दृष्टिकोण दिया। डेलीगेट्स ने महाकाव्य के विभिन्न प्रसंगों और पात्रों के माध्यम से आज के नेतृत्व व प्रबंधन (Management) के लिए निम्नलिखित अहम सबक साझा किए:
- संख्या बल से ऊपर सही मार्गदर्शन: समिति में चर्चा के दौरान यह बिंदु उभरकर आया कि जहां दुर्योधन ने भगवान कृष्ण की विशाल ‘नारायणी सेना’ को चुना, वहीं अर्जुन ने केवल निहत्थे कृष्ण के मार्गदर्शन (Mentorship) को प्राथमिकता दी। यह साबित करता है कि कॉर्पोरेट या राजनीतिक जगत में विशाल संसाधनों से ज्यादा जरूरी एक कुशल मार्गदर्शक और सटीक रणनीति होती है।
- नैतिकता और धर्म (Ethical Leadership): नेतृत्व में केवल जीत हासिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में नैतिक सत्यता और धर्म (सही मार्ग) का होना अनिवार्य है।
- अधूरा ज्ञान है सबसे बड़ा जोखिम: चक्रव्यूह में अभिमन्यु के प्रवेश और उसके दुखद अंत के प्रसंग से डेलीगेट्स ने यह सीख रेखांकित की कि किसी भी बड़ी रणनीति या व्यापारिक जोखिम को उठाते समय पूरा ज्ञान और संकट से बाहर निकलने की योजना (Exit Strategy) होना अनिवार्य है।
- बदलती परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन (Adaptability): पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान समय की मांग के अनुसार अपनी भूमिकाएं बदलीं (जैसे अर्जुन का नर्तक और भीम का रसोइया बनना)। आज के दौर के लीडर्स को भी बाजार और परिस्थितियों के अनुसार लचीला होना चाहिए।
युवाओं के कौशल विकास का बना सशक्त माध्यम
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ने छात्रों को केवल किताबी ज्ञान से परे जाकर व्यावहारिक कौशल सीखने का मंच दिया। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, इस आयोजन के माध्यम से छात्रों को गहन शोध (Research), प्रभावी सार्वजनिक भाषण (Public Speaking), संकट प्रबंधन (Crisis Management), बातचीत की कला (Negotiation) और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता (Decision-Making) को निखारने का बेहतरीन अवसर मिला।
SGSITS के इस मंच पर युवाओं ने यह साबित कर दिया कि भारत के प्राचीन ग्रंथ न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि आज के कॉर्पोरेट, राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की चुनौतियों को हल करने के लिए एक व्यावहारिक ‘प्रबंधन गाइड’ की तरह भी काम आ सकते हैं।

