मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने निर्धारित UPI मर्चेंट लेनदेन पर लगने वाले 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) को व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए “डिजिटल ट्रैप” बताया है।
राज ठाकरे ने 19 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में सवाल उठाया कि जब सरकार ने UPI को डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के लिए बढ़ावा दिया, तो इसके संचालन और साइबर सुरक्षा के लिए शुरुआत से ही स्थायी वित्तीय व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उन्होंने MDR का विरोध करते हुए व्यापारियों से इसका भुगतान नहीं करने की अपील भी की।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुसार यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाना है और MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि करीब 96% मर्चेंट UPI लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। MDR को ग्राहक पर डालने की अनुमति भी नहीं है।
राज ठाकरे ने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या व्यापारी MDR की लागत खुद वहन करेंगे या इसका बोझ ग्राहकों पर डालेंगे। उन्होंने इस व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने नोटबंदी, UPI के विस्तार और अब MDR लागू करने के फैसले को जोड़ते हुए केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि इस फैसले से पहले सरकार ने किन पक्षों से विचार-विमर्श किया।
वहीं, केंद्र सरकार ने UPI शुल्क व्यवस्था को डिजिटल भुगतान प्रणाली की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हुए कहा है कि MDR सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थानों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार ने यह भी कहा है कि ग्राहकों से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
इस तरह UPI पर MDR को लेकर सरकार की दलील और राज ठाकरे की आपत्ति आमने-सामने है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसका व्यापारियों और डिजिटल भुगतान पर वास्तविक असर कितना पड़ता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

