नई दिल्ली। दिल्ली की यमुना नदी की सफाई को लेकर केंद्र सरकार ने अब समयबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना पुनर्जीवीकरण अभियान की समीक्षा करते हुए साफ किया है कि नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को मिलकर काम करना होगा। सरकार का लक्ष्य 2029 तक यमुना को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाना है। वहीं, इससे पहले सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और औद्योगिक कचरे पर रोक लगाने के लिए कई चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं।
2029 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य
अमित शाह ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यमुना को साफ कर दिया जाएगा। इसके बाद 2026 में हुई समीक्षा बैठकों में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग कामों की समयसीमा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर जोर दिया गया।
यमुना की सफाई केवल नदी से कचरा निकालने तक सीमित नहीं है। नदी में पहुंचने वाले सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों के गंदे पानी को रोकना इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2027 तक 59 और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
सरकार की योजना यमुना में पहुंचने वाले सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता बढ़ाने की है। जून 2026 की समीक्षा में बताया गया कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 129 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पहले से चालू हैं, जबकि 2027 के अंत तक 59 और प्लांट बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
अमित शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ औद्योगिक डिस्चार्ज और नालों से निकलने वाले पानी की भी लगातार निगरानी की जाए। केवल प्लांट बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनमें आने वाले पानी और बाहर निकलने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच भी जरूरी होगी।
नालों की गाद निकालने पर भी जोर
यमुना में प्रदूषण का एक बड़ा कारण नदी में मिलने वाले नाले हैं। सरकार ने इन नालों की सफाई और उनमें जमा गाद को निकालने का काम भी तेज किया है।
जून 2026 की समीक्षा के दौरान बताया गया कि इस वर्ष नालों से 28.57 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें लगभग 97 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। अमित शाह ने यह भी निर्देश दिया कि निकाली गई गाद को इस तरह रखा और इस्तेमाल किया जाए कि बारिश के दौरान वह दोबारा यमुना में न पहुंचे।
हर 20 दिन में होगी प्रगति की समीक्षा
यमुना सफाई अभियान में अब नियमित मॉनिटरिंग को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की प्रगति की हर 20 दिन में समीक्षा की जाए।
दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को एक साझा एक्शन प्लान के तहत काम करने को कहा गया है, ताकि एक राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास का असर दूसरे राज्य की लापरवाही से प्रभावित न हो।
दिसंबर 2028 तक गंदा पानी रोकने की तैयारी
यमुना की सफाई के अंतिम लक्ष्य से पहले सरकार ने प्रदूषण के स्रोत को रोकने पर खास ध्यान दिया है। सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को बिना उपचार के नदी में जाने से रोकना इस पूरी योजना का अहम हिस्सा है।
2025 में अमित शाह ने सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को 2028 तक 1,500 MGD तक बढ़ाने पर जोर दिया था। इसका उद्देश्य यमुना में जाने वाले अनुपचारित पानी को नियंत्रित करना है।
डेयरी वेस्ट से भी प्रदूषण रोकने की योजना
यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट पर भी ध्यान दिया गया है। दिल्ली नगर निगम और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच डेयरी वेस्ट को बायोगैस और जैविक खाद में बदलने की दिशा में काम करने की योजना है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेयरियों और पशु बाड़ों से निकलने वाला अपशिष्ट सीधे नालों अथवा नदी में न पहुंचे।
BOD, COD और TSS की होगी निगरानी
सरकार ने यमुना में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वैज्ञानिक निगरानी पर भी जोर दिया है। नालों और सीवेज से निकलने वाले पानी में BOD, COD और TSS जैसे प्रदूषण मानकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि ट्रीटमेंट प्लांट और प्रदूषण नियंत्रण उपाय वास्तव में कितना प्रभावी काम कर रहे हैं।
2029 की डेडलाइन क्यों अहम?
यमुना की सफाई को लेकर लंबे समय से कई योजनाएं चलती रही हैं, लेकिन नदी में प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। इस बार सरकार ने नदी की सफाई को अलग-अलग समयसीमाओं से जोड़ने की कोशिश की है।
2027 तक अतिरिक्त STP, 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में बड़ा विस्तार और अनुपचारित पानी को नदी में जाने से रोकने की व्यवस्था—इन चरणों के बाद 2029 तक यमुना को साफ करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
अब चुनौती यह होगी कि तय समयसीमा में सभी परियोजनाएं पूरी हों, उनका संचालन प्रभावी तरीके से हो और दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा व उत्तर प्रदेश में भी प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार नियंत्रण बना रहे।
क्या है पूरा टाइमलाइन?
- 2027: 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का लक्ष्य।
- 2028: सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को 1,500 MGD तक बढ़ाने की दिशा में काम।
- हर 20 दिन: यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की प्रगति की समीक्षा।
- 2029: यमुना को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने का व्यापक लक्ष्य।
यमुना की सफाई का यह अभियान अब केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरे की निगरानी, नालों की सफाई, डेयरी वेस्ट मैनेजमेंट और नदी के पर्यावरणीय प्रवाह जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की योजना है।

