सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से सरकारी कर्मचारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पटवारी पानी से भरे नाले को पार करने के लिए करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण की पीठ पर बैठा नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई और मामले ने तूल पकड़ लिया।
मामला सीधी जनपद क्षेत्र की माटा ग्राम पंचायत का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान हल्का पटवारी नीलेश नामदेव के रूप में हुई है। बताया गया कि पटवारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए ग्रामीण इलाके में पहुंचे थे। रास्ते में पानी से भरा नाला पड़ा, जिसे पार करने के लिए उन्होंने खुद पानी में उतरने के बजाय बुजुर्ग ग्रामीण का सहारा लिया।
बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पार किया नाला
वायरल वीडियो में बुजुर्ग ग्रामीण पानी और कीचड़ से होकर आगे बढ़ता दिखाई देता है, जबकि पटवारी उसकी पीठ पर बैठा हुआ नजर आता है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बुजुर्ग की पहचान ललवा केवट के रूप में बताई गई है।
वीडियो में ग्रामीणों की बातचीत भी सुनाई देती है। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि नाले में पानी बहुत ज्यादा गहरा नहीं था और पटवारी आसानी से खुद भी उसे पार कर सकते थे। ऐसे में बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर नाला पार करने के तरीके को लोगों ने बेहद असंवेदनशील बताया। हालांकि, वीडियो की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सीधी जिले के पटवारी जूते गीले होने से बचाने के लिये नाले पार करने के लिये बुजुर्ग की पीठ पर सवार हो गये,, वीडियो वायरल हुआ तो पटवारी नीलेश निलंबित हो गये @VistaarNews pic.twitter.com/PGI2DeZPvf
— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) September 9, 2026
फसल नुकसान का जायजा लेने निकले थे पटवारी
बताया गया कि विंध्य क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण किसानों की फसलों को नुकसान हुआ था। नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा था।
इसी सिलसिले में माटा ग्राम पंचायत के हल्का पटवारी नीलेश नामदेव भी क्षेत्र में सर्वे के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान नाला पार करने का यह घटनाक्रम सामने आया।
वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने लिया संज्ञान
वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने पटवारी के खिलाफ अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की।
हालांकि, यहां एक अहम तथ्य सामने आया है। सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा के मुताबिक वायरल वीडियो करीब एक साल पुराना है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नीलेश नामदेव के खिलाफ कार्रवाई केवल इस वीडियो के आधार पर नहीं की गई है।
राहत कार्यों में गड़बड़ी और सुविधा शुल्क के आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक पटवारी के खिलाफ ग्रामीणों की ओर से अन्य शिकायतें भी की गई थीं। इनमें सरकारी पट्टा, पीएम किसान सम्मान निधि, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित कार्यों के लिए सेवा शुल्क के नाम पर पैसे मांगने जैसे आरोप शामिल हैं।
प्रशासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और राहत कार्यों में कथित गड़बड़ी को भी कार्रवाई का आधार बनाया।
निलंबन आदेश में वीडियो का भी उल्लेख
जानकारी के अनुसार, गोपद बनास एसडीएम की ओर से जारी निलंबन आदेश में बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरे गड्ढे को पार करने वाली घटना का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने इस व्यवहार को असंवेदनशील और प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना है।
इसके बाद पटवारी नीलेश नामदेव को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय गोपद बनास निर्धारित किया गया है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में वायरल वीडियो ने सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली और ग्रामीणों के साथ व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर पटवारी के खिलाफ अन्य शिकायतों और राहत कार्यों से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वीडियो पुराना बताया गया है और कलेक्टर के अनुसार निलंबन की कार्रवाई राहत कार्यों में कथित गड़बड़ी तथा ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर हुई है। इसलिए वायरल वीडियो को निलंबन की एकमात्र वजह बताना पूरी तरह सही नहीं होगा।

