सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र में एनसीएल बीना में कार्यरत एक सीनियर ओवरमैन की संदिग्ध मौत का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला सड़क हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का निकला। मृतक की पत्नी ने कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और वारदात को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को सड़क पर रखकर कार से कुचलने की कोशिश की।
पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की है। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल ब्रेजा कार, शव लपेटने वाली चादर और दो गमछे बरामद किए गए हैं।
ड्यूटी से जल्दी घर लौटे तो खुल गया राज
मृतक की पहचान रमाशंकर मिश्रा, पुत्र द्वारिका प्रसाद मिश्रा, निवासी बेलवा बड़गैय्यान, थाना बैकुंठपुर, जिला रीवा, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। वह एनसीएल बीना में सीनियर ओवरमैन के पद पर तैनात थे और शक्तिनगर क्षेत्र स्थित बीना कॉलोनी के आवास में रहते थे।
पुलिस जांच के मुताबिक, आम दिनों में रमाशंकर की ड्यूटी शाम करीब चार बजे खत्म होती थी और वह लगभग पांच बजे अपने आवास पहुंचते थे। लेकिन 22 अगस्त 2026 को शनिवार होने के कारण वह सामान्य समय से पहले घर पहुंच गए।
पुलिस के अनुसार, घर पहुंचने पर उन्होंने अपनी पत्नी प्रियंका मिश्रा को विकास चौहान के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
विवाद के बाद गला दबाकर हत्या का आरोप
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि विवाद के दौरान प्रियंका मिश्रा और विकास चौहान ने कथित तौर पर रमाशंकर मिश्रा का गला दबाया और जमीन पर सिर पटककर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर वारदात छिपाने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, शव को करीब 12 घंटे तक आवास के अंदर रखा गया और बाद में उसे चादर व गमछे में लपेटकर रात के समय बाहर ले जाया गया।
सड़क हादसा दिखाने की रची गई साजिश
पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को सड़क पर रखा गया। इसके बाद विकास चौहान ने अपने सहयोगियों अनुराग सिंह उर्फ बादल और सोनू गुप्ता के साथ मिलकर कथित तौर पर शव को वाहन से चोट पहुंचाई।
पुलिस के अनुसार, शव पर ब्रेजा कार को आगे-पीछे कर दो बार चलाया गया, ताकि मामला सड़क दुर्घटना जैसा दिखाई दे।
जांच में पुलिस को आर्थिक लाभ की मंशा की भी जानकारी मिलने की बात कही गई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि मृतक के बीमा अथवा अन्य आर्थिक लाभ से जुड़े संभावित पैसे को हासिल करने के लिए दुर्घटना की कहानी तैयार की गई थी या नहीं।
घटनास्थल के साक्ष्यों से खुलता गया मामला
शुरुआत में रमाशंकर की मौत सड़क दुर्घटना जैसी प्रतीत हुई थी। हालांकि घटनास्थल की बारीकी से जांच करने पर पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनसे मामला संदिग्ध नजर आया।
पुलिस ने मृतक के वाहन की स्थिति, शव की स्थिति, अलग-अलग स्थानों पर मिले जूते और सिर में आई चोटों समेत अन्य भौतिक साक्ष्यों को जांच का आधार बनाया।
इसके बाद मृतक और संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा लोकेशन का परीक्षण किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के साथ घटनास्थल से मिले भौतिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस हत्या की कड़ियों तक पहुंची।
पिता की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा
मृतक के पिता रामयश मिश्रा, पुत्र द्वारिका प्रसाद मिश्रा, निवासी ग्राम बेलवा बड़गैय्यान, थाना बैकुंठपुर, जिला रीवा की तहरीर पर शक्तिनगर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 162/2026 दर्ज किया गया था।
पुलिस ने मामले में धारा 103(2)/238 बीएनएस के तहत कार्रवाई शुरू की। विवेचना के दौरान मृतक की पत्नी प्रियंका मिश्रा और विकास चौहान के बीच कथित प्रेम संबंध की जानकारी सामने आई।
चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा मुकदमा दर्ज होने के करीब 24 घंटे के भीतर कर दिया गया। घटना में कथित रूप से शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में:
- प्रियंका मिश्रा, उम्र करीब 35 वर्ष
- विकास चौहान
- अनुराग सिंह उर्फ बादल, पुत्र ध्रुव कुमार सिंह
- सोनू गुप्ता, पुत्र सुभाष गुप्ता
पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की है।
ब्रेजा कार समेत सामान बरामद
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना से संबंधित ब्रेजा कार क्रमांक UP 64 AZ 75-66 बरामद की है। इसके अलावा शव को लपेटने के लिए इस्तेमाल की गई एक डबल बेड की चादर और दो गमछे भी पुलिस ने बरामद किए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन बरामद वस्तुओं को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है और मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
बेटियों के सामने वारदात होने की बात की भी जांच
मामले में मृतक के परिवार की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि घटना के दौरान मृतक की दोनों बेटियां वहां मौजूद थीं और उन्होंने घटनाक्रम देखा। परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया कि बच्चियों को पहले से डराकर रखा जाता था।
हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और बयानों के आधार पर होगी। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
बीमा और आर्थिक लाभ का एंगल भी जांच में
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को दुर्घटना का रूप देने के पीछे आर्थिक लाभ की मंशा का पहलू भी सामने आया है। मृतक एनसीएल में कार्यरत थे, ऐसे में उनके बीमा, सेवा लाभ अथवा अन्य आर्थिक देनदारियों से जुड़े संभावित लाभ को लेकर भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध चिकित्सीय, तकनीकी, भौतिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार बनाकर विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है।
24 घंटे में खुलासा, पुलिस की कार्रवाई की चर्चा
घटना के बाद एनसीएल अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश और चिंता थी। शुरुआत में मामला सड़क हादसे का प्रतीत होने के कारण पुलिस के सामने वास्तविक वजह तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था।
लेकिन घटनास्थल से मिले संदिग्ध संकेतों, तकनीकी जांच और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने का दावा किया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर चार आरोपियों की गिरफ्तारी कर मामले का खुलासा किया।
फिलहाल प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और पुलिस घटना से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।

